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10 साल के बच्चे तय कर रहे खरीदारी, जेन अल्फा बदल रहे कंपनियों की स्ट्रैटेजी

जेन अल्फा के करीब आधे बच्चे किसी खास ब्रांड की मांग करते हैं। यानी कम उम्र में ही उनमें ब्रांड की समझ विकसित हो रही है

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 16, 2026 | 1:59 PM IST

भारत में जेन अल्फा यानी नई डिजिटल पीढ़ी तेजी से बाजार को प्रभावित कर रही है। यह पीढ़ी देश की कुल आबादी का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा है। इनमें से 73% बच्चों के पास अपना स्मार्टफोन है और 60% लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। रुकम कैपिटल ने ‘Gen Alpha Decoded: The Consumer-Brand Dynamic’ नाम की एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि यह पीढ़ी कैसे खरीदारी और ब्रांड के साथ जुड़ने के तरीके को बदल रही है।

कम उम्र में ही ब्रांड की समझ

रिपोर्ट के मुताबिक, जेन अल्फा के करीब आधे बच्चे किसी खास ब्रांड की मांग करते हैं। यानी कम उम्र में ही उनमें ब्रांड की समझ विकसित हो रही है। करीब 66% बच्चे घर के रोजमर्रा के फैसलों को प्रभावित करते हैं, जिससे साफ है कि अब बच्चे भी घर के बड़े निर्णयों में भूमिका निभा रहे हैं।

जेन अल्फा के बच्चे पैसे के मामले में भी काफी जागरूक हैं। करीब 70% बच्चे पैसे कमाने के तरीकों के बारे में जानना चाहते हैं। 31% बच्चे अपनी पॉकेट मनी बचाते हैं, जबकि कुछ बच्चे डिजिटल चीजों जैसे गेम और सब्सक्रिप्शन पर खर्च भी करते हैं। यह पीढ़ी सिर्फ ट्रेंड फॉलो नहीं करती, बल्कि सोच-समझकर फैसला लेती है। करीब 34% बच्चे प्रोडक्ट की खासियत देखकर खरीदारी करते हैं, और उतने ही बच्चे उसकी सीखने वाली वैल्यू को भी देखते हैं। करीब 31% बच्चे पर्यावरण को ध्यान में रखकर ब्रांड चुनते हैं।

सोशल मीडिया और ट्रेंड का असर

अगर नए फीचर आते हैं या सोशल मीडिया पर कोई ट्रेंड बनता है, तो बच्चे जल्दी ब्रांड बदलते हैं। करीब 37% बच्चे सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होते हैं। जेन अल्फा के लिए ‘कूल’ होने का मतलब सिर्फ स्टाइल नहीं है। करीब 29% बच्चे पढ़ाई में अच्छा होना कूल मानते हैं, जबकि 27% खेल या अन्य गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन को कूल मानते हैं।

खाने की पसंद में भी बदलाव दिख रहा है। कुछ बच्चे हेल्दी खाना पसंद करते हैं, तो कुछ फास्ट फूड चुनते हैं। करीब 82% बच्चे नियमित रूप से यूट्यूब देखते हैं और यहीं से खाना, म्यूजिक और डांस के बारे में सीखते हैं।

घर के फैसलों में बच्चों की बढ़ती भूमिका

बच्चे अब घर में अपनी बात मनवाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कोई सही समय का इंतजार करता है, कोई समझाकर मनाता है, तो कोई बार-बार कोशिश करता है। खिलौने, कपड़े, खाने-पीने की चीजें और यहां तक कि आउटिंग के फैसलों में भी बच्चों का बड़ा असर है। हालांकि, कार खरीदने या छुट्टी की प्लानिंग जैसे बड़े फैसले अभी भी ज्यादातर माता-पिता ही लेते हैं। जेन अल्फा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी पसंद और पहचान दिखाने का जरिया भी हैं। यूट्यूब, ओटीटी और गेमिंग प्लेटफॉर्म उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट

रुकम कैपिटल की फाउंडर अर्चना जहागिरदार के मुताबिक, जेन अल्फा आने वाले समय में घर के करीब 80% खरीदारी फैसलों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कंपनियों को अब इस नई पीढ़ी को समझकर अपनी रणनीति बनानी होगी।

First Published : April 16, 2026 | 1:59 PM IST