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2025 में ग्लोबल स्ट्रीमिंग का रह सकता है दबदबा! पे-टीवी को पछाड़ने की तैयारी

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पांच बड़ी स्ट्रीमिंग कंपनियों के कुल 818 मिलियन पेड सब्सक्रिप्शन होंगे, जिनमें से करीब 250 मिलियन यानी 30 प्रतिशत एड-टीयर (विज्ञापन आधारित प्लान) पर होंगे।

Last Updated- January 07, 2025 | 12:26 PM IST
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वीडियो स्ट्रीमिंग का कारोबार दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। इस साल पहली बार स्ट्रीमिंग वीडियो की कमाई ($213 बिलियन) पे-टीवी की कमाई ($188 बिलियन) से ज्यादा होगी।

हर बड़े सब्सक्रिप्शन वाले स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने अब विज्ञापन वाला प्लान शुरू कर दिया है, और फ्री मॉडल की तरफ यह रुझान बढ़ता रहेगा। आगे की बढ़त टीवी जैसे मॉडल पर निर्भर करेगी – डिस्ट्रीब्यूशन, प्राइसिंग और प्रोग्रामिंग के मामले में।

अमेरिका के पांच बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म – नेटफ्लिक्स, डिज्नी+, पैरामाउंट+, अमेज़न प्राइम वीडियो और मैक्स – अब पारंपरिक पे टीवी जैसा रूप लेने लगे हैं। लंदन की ग्लोबल एनालिस्ट फर्म ओमडिया के सीनियर एनालिस्ट टोनी गुन्नारसन ने कहा है कि ये सभी प्लेटफॉर्म विज्ञापन, खेलों की बड़ी रेंज और बंडल्ड डिस्ट्रीब्यूशन की वजह से अब ‘पे टीवी 2.0’ की तरह दिखने लगे हैं।

ओमडिया की रिपोर्ट ‘2025 ट्रेंड्स टू वॉच’ के मुताबिक, स्ट्रीमिंग वॉर अब खत्म हो चुकी है। अब विज्ञापन आधारित मॉडल का दौर है और स्टैंडअलोन सब्सक्रिप्शन वीडियो ऑन डिमांड (SVoD) बंडल्स नई हकीकत बन जाएंगे। लेकिन ये बदलाव भारत में सीधे लागू नहीं होंगे। विशेषज्ञ गुनार्सन का कहना है कि भारत में पे-टीवी (Pay-TV) का दबदबा लंबे समय तक बरकरार रहेगा। उनके मुताबिक, आने वाले सालों में पे-टीवी न केवल राजस्व में सबसे आगे रहेगा, बल्कि इसमें वृद्धि भी देखने को मिलेगी।

रिपोर्ट में 2025 में स्ट्रीमिंग सेवाओं के बढ़ते ‘लिनियराइजेशन’ पर जानकारी दी गई है।

पांच बड़ी स्ट्रीमिंग कंपनियों के कुल 818 मिलियन पेड सब्सक्रिप्शन होंगे, जिनमें से करीब 250 मिलियन यानी 30 प्रतिशत एड-टीयर (विज्ञापन आधारित प्लान) पर होंगे।

पिछले साल, अमेरिका में SVoD (सब्सक्रिप्शन वीडियो ऑन डिमांड) से हुई कुल कमाई का 24 प्रतिशत हिस्सा एड-टीयर से आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी एंट्री-लेवल SVoD सब्सक्रिप्शन में विज्ञापन शामिल होते हैं और उपभोक्ताओं की विज्ञापन स्वीकार्यता आने वाले समय में बढ़ने की संभावना है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के पेड ऑफरिंग का दायरा बढ़ने से अब नए मार्केट्स में बड़ी ग्लोबल सर्विसेस सीधे कस्टमर्स को टारगेट नहीं करेंगी। इसके बजाय, ये लोकल प्रोवाइडर्स जैसे पे-टीवी या लोकल स्ट्रीमिंग सर्विसेस के साथ पार्टनरशिप करेंगी। उदाहरण के लिए, एचबीओ का मैक्स अभी तक इंडिया में लॉन्च नहीं हुआ है। इंडिया के एड-डिपेंडेंट मार्केट को देखते हुए, यह ट्रेंड यहां भी देखने को मिल सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री कस्टमर्स की जरूरतों से थोड़ा दूर हो गई है। वेस्टर्न कंट्रीज में डायरेक्ट-टू-कस्टमर मॉडल ज्यादा काम नहीं कर रहा। इसके बजाय, सर्विसेस को बंडल और पैकेज करके पेश करना ज्यादा फायदेमंद है। गुनार्सन कहते हैं, “जब तक स्ट्रीमिंग सर्विसेस पे-टीवी जैसा एक्सपीरियंस नहीं देंगी, तब तक यह सभी के लिए टफ कॉम्पिटीशन रहेगा।”

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First Published - January 7, 2025 | 12:26 PM IST

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