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गोदरेज एरोस्पेस की ऊंची उड़ान: 2032 तक सालाना 20% विकास का लक्ष्य, मुंबई में लगेगा नया प्लांट

गोदरेज एरोस्पेस 2032 तक 20% सालाना वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी नवी मुंबई में ₹500 करोड़ के निवेश से नई विनिर्माण इकाई स्थापित करेगी

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दीपक पटेल   
Last Updated- May 06, 2026 | 1:37 AM IST

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप की वाणिज्यिक एरोस्पेस विनिर्माण इकाई को वित्त वर्ष 32 तक सालाना कम से कम 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मांग मजबूत बनी हुई है और उत्पादन काफी हद तक स्थिर बना हुआ है। इकाई के कार्यकारी उपाध्यक्ष और कारोबार प्रमुख मानेक बेहरामकामदीन ने आज यह जानकारी दी।

बेहरामकामदीन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा कि समूह के वाणिज्यिक एरोस्पेस कारोबार ने वित्त वर्ष 26 में 435 करोड़ रुपये का कुल राजस्व दर्ज किया था और यह इकाई कोविड-19 के बाद से राजस्व में हर साल 30 प्रतिशत की वृद्धि कर रही है।

कंपनी अब अपना खुद का डिजाइन प्लेटफॉर्म बना रही है, विशेष रूप से सर्वो एक्चुएटर और इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्चुएटर जैसे पुर्जों के लिए। वह बिल्ड-टु-प्रिंट विनिर्माता से डिजाइन-आधारित कंपनी बनने के लिए मूल्य श्रृंखला में बढ़ने पर विचार कर रही है।

बेहरामकामदीन ने कहा कि अगले कुछ वर्षों के दौरान बौद्धिक संपदा विकसित करना और ‘एक्चुएशन प्रणाली के लिए डिजाइन हाउस बनने का लक्ष्य है। ये प्रणालियां विमान के अहम पुर्जे होते हैं जो पंखों और लैंडिंग गियर जैसे हिस्सों की गति को नियंत्रित करती हैं। इससे वे एरोस्पेस विनिर्माण में अधिक मूल्य वाली श्रेणी बन जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘हमारा ध्यान अगले चार से पांच वर्षों के दौरान अपने डिजाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने पर रहेगा।’ वर्तमान में कंपनी के पास छोटी, लेकिन बढ़ने वाली डिजाइन टीम है और वह मॉडलिंग और विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में क्षमताओं के निर्माण के लिए बाहरी विशेषज्ञों के साथ साझेदारी भी कर रही है, जो उड़ान के महत्त्वपूर्ण पुर्जों के विकास के लिए  आवश्यक होते हैं।

इनपुट लागत के बारे में पूछे जाने पर बेहरामकामदीन ने कमोडिटी के वैश्विक बाजारों में अस्थिरता की ओर इशारा किया, विशेष रूप से हाल ही में 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से एरोस्पेस विनिर्माण में उपयोग की जाने वाली धातुओं के संबंध में।

विस्तार के बारे में उन्होंने कहा कि समूह ने नई एरोस्पेस विनिर्माण इकाई के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है, जो मुंबई में उसके मौजूदा संयंत्र से काफी बड़ी होगी। नवी मुंबई के पास बनने वाली यह इकाई क्षमता बढ़ाने तथा अधिक जटिल पुर्जों को संभालने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।

First Published : May 6, 2026 | 1:37 AM IST