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दार्जिलिंग की मशहूर चाय बेचने वाली कंपनी अब घी और पनीर क्यों बेचने जा रही है, जानिए पूरा प्लान

चाय से कमाई घटने लगी तो गुडरिक ने चुना नया रास्ता, अब डेरी कारोबार में उतरेगी कंपनी

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ईशिता आयान दत्त   
Last Updated- April 02, 2026 | 8:56 AM IST

ब्रिटेन की कैमेलिया पीएलसी की सूचीबद्ध भारतीय कंपनी गुडरिक ग्रुप अब चाय के प्याले से आगे की योजना बना रही है। दार्जिलिंग में कैसलटन जैसे ऐतिहासिक बागान की चाय के लिए प्रसिद्ध यह दिग्गज चाय कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला रही है।

गुडरिक ब्रांड के तहत घी और पनीर जैसे उत्पाद जल्द ही बाजार में आने वाले हैं। गुडरिक के बैनर तले ‘ए2’ घी पहला ऐसा गैर-चाय वाला ब्रांडेड उत्पाद होगा, जो अगले महीने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मिलने वाला है। गुडरिक ग्रुप के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी शैबल दत्त ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम भीड़भाड़ वाली आम श्रेणी में काम नहीं करना चाहते, हमारा ध्यान प्रीमियम क्षेत्र पर है। यह उत्पाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और हमारी अपनी वेबसाइट के जरिये गुडरिक ब्रांड के तहत बेचा जाएगा।’

इस पहल के तहत दुआर्स में कंपनी के लखीपाड़ा चाय बागान में लगभग 150 गायें हैं। दत्त ने कहा, ‘हमारे बागान में करीब 70 हेक्टेयर खाली जमीन थी, जिसका इस्तेमाल अब डेरी परियोजना के लिए किया जा रहा है। साल 2026 के अंत तक गायों की संख्या बढ़कर लगभग 180 हो जाएगी और अगले पांच वर्षों में यह संख्या 500 तक बढ़ाने का लक्ष्य है।’

घी के बाद डेरी पोर्टफोलियो से पेश होने वाला अगला उत्पाद पनीर होगा। दत्त ने बताया, ‘हम अभी भी दूध और उसे पेश किए जाने वाले स्वरूप पर विचार कर रहे हैं, कि वह पाउच में होगा या बोतलों में ताजा दूध के रूप में होगा। लेकिन इसके लिए कोल्ड चेन में निवेश की आवश्यकता होगी। इसलिए हम अब भी अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।’

शहद और काली मिर्च कभी गुडरिक के दार्जिलिंग टी लाउंज, मार्गरेट्स डेक में सीमित तरीके से बेचे जाने वाले गैर-चाय उत्पादों में शामिल थे। अलबत्ता ये बिना ब्रांड वाले थे। गुडरिक की गैर-चाय वाली अपनी जमीन का लाभ उठाने की योजना पिछले साल कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को बताई गई थी। कंपनी के प्रबंधन ने कहा था कि वह अपनी भूमि परिसंपत्तियों का उपयोग करके विविध कृषि और आतिथ्य उद्यम तलाश रहा है। इनमें से हल्दी, लहसुन, अदरक, मशरूम के साथ-साथ डेरी और सूअर पालन जैसी शुरुआती परियोजनाएं विकास चरण में हैं।

इस कदम का उद्देश्य असम, दार्जिलिंग और दुआर्स में फैले चाय बागानों पर कंपनी की निर्भरता कम करना भी है। यह उद्योग बढ़ती लागत और कीमतों में स्थिरता से जूझ रहा है। पिछले साल गुडरिक ने दो बागान बेचे, कुछ और पर भी विचार हो रहा है। ब्रांडेड चाय की गुडरिक के राजस्व में लगभग 23 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और निर्यात का हिस्सा 5 प्रतिशत है। ये दोनों कारोबार में ज्यादा मुनाफे वाले हिस्से हैं।

First Published : April 2, 2026 | 8:56 AM IST