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सरकार ने REC से कोयला क्षेत्र में निवेश और खदानों को फंड प्रदान करने का आग्रह किया

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सचिव ने खनन के टिकाऊ तरीकों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि कोयला मंत्रालय भूमिगत खदानों से उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रहा है।

Last Updated- November 02, 2023 | 7:49 PM IST
कोल इंडिया

कोयला मंत्रालय ने आरईसी से कोयला क्षेत्र में निवेश पर विचार करने और खदानों को वित्तपोषण प्रदान करने का आग्रह किया है। आरईसी सरकारी स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) कंपनी है।

राष्ट्रीय राजधानी में ‘वाणिज्यिक खनन और एमडीओ के लिए अनुकूलित ऋण-वित्तपोषण’ पर एक कार्यशाला में कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह क्षेत्र मजबूत और जिम्मेदार बन रहा है।

उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय इस सूखे ईंधन की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न उपाय कर रहा है और पिछले चार वर्षों में वाणिज्यिक उपयोग के लिए 91 कोयला खदानों की नीलामी की गई है। उन्होंने कहा कि एक कोयला खदान का वित्तपोषण पहले ही पूरा हो चुका है और दो अन्य के लिए वित्तपोषण मूल्यांकन का काम उन्नत चरण में है।

समझौतों में ऋणदाताओं के हितों की रक्षा के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। कोयला सचिव अमृत लाल मीणा ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से वाणिज्यिक कोयला खदानों के लिए ऋण उपलब्धता के संबंध में प्रस्तावों पर काम करते हुए उचित समाधान खोजने को कहा।

मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि खनन एक अच्छा और लाभदायक दीर्घकालिक कारोबार है, जिसमें कोयला खदानों के आवंटन के तीन से चार साल बाद निश्चित लाभ मिलना शुरू हो जाता है। उन्होंने कोयला खदानों को उनके परिचालन जीवन के अंत तक पहुंचने पर कुशलतापूर्वक बंद करने और स्थायी प्रयासों के लिए ऐसी समाप्त हो चुकी खदानों को फिर से जीवंत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

सचिव ने खनन के टिकाऊ तरीकों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि कोयला मंत्रालय भूमिगत खदानों से उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोयला क्षेत्र विकास के चरण में है और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाकर कोयला आयात को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

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First Published - November 2, 2023 | 7:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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