होर्मुज स्ट्रेट संकट अब एक जटिल चरण में प्रवेश कर रहा है। कूटनीतिक प्रयासों में बाधाएं और चीन के जहाजों की आवाजाही में व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा सकते हैं। फार्मास्युटिकल क्षेत्र पर आम तौर पर किसी भी घटना का देर से असर पड़ता है मगर पश्चिम एशिया में 45 दिनों से अधिक के व्यवधान के बाद अब इस क्षेत्र पर भी प्रभाव दिखने लगा है।
यह स्थिति ऊर्जा संकट से व्यापक व्यापार बाधा में बदल रही है। चीनी पोतों के लिए सुरक्षित मार्ग में बाधा ने एक्टिव फार्मा सामग्री (एपीआई) और मुख्य प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) जैसे महत्त्वपूर्ण कच्चे माल की आवाजाही पर चिंता बढ़ा दी है। इसकी वजह यह है कि इनमें से कई कच्चे माल चीन में बनाए जाते हैं या उसके माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों में आपूर्ति होती है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में पोतों की आवाजाही में देर होने से भारत में माल की आवक धीमी हो गई है जिससे मुंद्रा और जेएनपीटी जैसे बंदरगाह प्रभावित हो रहे हैं।
भारत का फार्मा उद्योग बल्क ड्रग्स के लिए चीन पर निर्भर है। महामारी के बाद तैयार किए गए 3 से 6 महीने के स्टॉक बफर से उद्योग को तत्काल सहारा मिल रहा है मगर लंबे समय तक स्थिति इसी तरह बनी रही तो मुश्किल बढ़ सकती है।
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनैंशियल ने कहा कि निकट अवधि का प्रभाव अभी भी नियंत्रित है, जिसमें कच्चे तेल और माल ढुलाई से लागत में 2 से 5 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टॉक बफर से आगे व्यवधानों के बढ़ने से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उद्योग में लागत का दबाव भी दिख रहा है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि ऊर्जा और बिजली की लागत 20 से 30 फीसदी बढ़ी है जिससे पेट्रोरसायन संबंधित सॉल्वेंट और इंटरमीडिएट की कीमतें बढ़ी हैं। इससे एपीआई विनिर्माताओं की लागत बढ़ रही है और यदि व्यवधान जारी रहता है तो इसमें और वृद्धि की आशंका है। बीएएसएफ जैसे वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं ने दवाओं के सहायक तत्व (एक्सिपिएंट्स) और चुनिंदा एपीआई के दाम में 20 फीसदी तक बढ़ाने की घोषणा की है।
फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा, ‘सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल का है। आपूर्ति श्रृंखला काम कर रही है लेकिन देरी के साथ क्योंकि यूरोप से जहाज स्वेज मार्ग से केप ऑफ गुड होप की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं जिससे समय 40 से 45 दिन तक बढ़ रहा है।’
जेएम फाइनैंशियल का अनुमान है कि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र को शिपमेंट में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ सकती है।
उद्योग के एक कार्याधिकारी ने कहा कि भारत के फार्मा निर्यात का लगभग 6 फीसदी तत्काल जोखिम में है क्योंकि पश्चिम एशिया के शिपमेंट होर्मुज से होकर गुजरते हैं। उन्होंने कहा, ‘इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा दुबई के माध्यम से होता है जो एक पुनर्वितरण केंद्र के रूप में कार्य करता है। शिपिंग की स्थिति में किसी भी सख्ती का मतलब है कि कार्गो को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।’
ईरान में भारत की दवाओं का अच्छा खासा बाजार है। भारत ईरान में जेनेरिक दवाओं की मांग के लगभग 40 फीसदी की आपूर्ति करता है।