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AI और Biotech की वजह से भारत में बढ़ रही Pharma Jobs! अगले 3 साल में बड़ा उछाल

अमेरिका-यूरोप से भारत शिफ्ट हो रहे क्लिनिकल रिसर्च प्रोजेक्ट

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अंजलि सिंह   
Last Updated- May 25, 2026 | 8:55 AM IST

वैश्विक दवा कंपनियों के लिए भारत अब कम लागत वाले आउटसोर्सिंग गंतव्य से बढ़कर लगातार रणनीतिक नवाचार और निर्णायक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसकी वजह यह है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां अधिक मूल्य वाले क्लीनिकल अनुसंधान और विकास (आरऐंडडी) कार्यों को भारत भेज रही हैं। वैश्विक क्लीनिकल अनुसंधान और दवा विकास सेवा क्षेत्र की कंपनी पैरेक्सल ने यह जानकारी दी है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में पैरेक्सल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजय व्यास ने कहा कि अब कंपनी के 24,000 से अधिक वैश्विक कार्यबल में भारत की 6,000 से अधिक कर्मचारियों यानी लगभग 25 से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय परिचालन पारंपरिक सहायक कार्यों से आगे बढ़कर प्रमुख क्लीनिकल गतिविधियों की व्यापक श्रृंखला को संभाल रहे हैं। इनमें क्लीनिकल परिचालन, फार्माकोविजिलेंस, नियामकीय मामले , बायोस्टैटिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और एआई-सक्षम स्वचालन शामिल हैं।

व्यास ने कहा, ‘भारत अब केवल लागत लाभ तक सीमित नहीं रह गया है। चर्चा अब तेजी से मूल्य से फायदा उठाने की ओर बढ़ रही है।’ उन्होंने कहा कि वैश्विक दवा कंपनियां नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास और बड़े स्तर वाले क्लीनिकल परीक्षण परिचालन के लिए भारत से फायदा उठा रही हैं।

उन्होंने बताया कि कई बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने भारत में बड़े क्षमता हब स्थापित कर लिए हैं। अहम कार्य तथा निर्णायक जिम्मेदारियां धीरे-धीरे अमेरिका और यूरोप से भारतीय केंद्रों में आ रही हैं। पैरेक्सल इंडिया लगभग पूर्ण-विकसित स्वतंत्र क्लीनिकल अनुसंधान संगठन की तरह काम कर रही है। वह बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों और भारतीय बायोटेक कंपनियों दोनों को ही मदद देती है।

उन्होंने ने कहा कि भारत बायोटेक और बायोसिमिलर कंपनियों के लिए विशेष रूप से ऑन्कोलॉजी, श्वसन चिकित्सा, इम्यूनोलॉजी के साथ-साथ सेल और जीन उपचार जैसे क्षेत्रों में अहम बाजार के रूप में उभर रहा है। चूंकि बायोटेक्नॉलजी और आधुनिक उपचारों में निवेश बढ़ रहा है। इसलिए पैरेक्सल को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में भारत में उसके कर्मचारियों की संख्या में और वृद्धि होगी। व्यास ने कहा, ‘अगर अगले तीन वर्षों में हम भारत में 8,000 कर्मचारियों की बात करें, तो मुझे हैरानी नहीं होगी।’

यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब भारत का नियामकीय माहौल और क्लीनिकल परीक्षण का तंत्र लगातार परिपक्व हो रहा है। व्यास ने कहा कि भारत के क्लीनिकल परीक्षण संबंधी नियम लगातार अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए), ब्रिटेन की मेडिसिन्स ऐंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) और यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए) के मानकों के अनुरूप हो रहे हैं।

भारत में अलहदा और डिजिटल क्लीनिकल परीक्षणों में भी दिलचस्पी दिख रही है, खास तौर पर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की अगुआई में ऑटोमेशन, रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग और फार्माकोविजिलेंस के संबंध में। व्यास ने कहा कि क्लीनिकल परीक्षणों की बढ़ती जटिलता और बड़ा स्तर कंपनियों को दवा विकास की समय-सीमा में तेजी लाने और नियामकीय आवेदन को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित वर्कफ्लो अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

First Published : May 25, 2026 | 8:54 AM IST