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देश के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का राजस्व पिछले वित्त वर्ष के आखिर तक करीब 98.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो दो साल पहले लगभग 65 अरब डॉलर था। नैसकॉम और परामर्श कंपनी जिनोव की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यह बात देश के प्रौद्योगिकी उद्योग में इस क्षेत्र की बढ़ती अहमियत को बताती है।
जीसीसी की संख्या भी 2,000 को पार कर चुकी है। मार्च के अंत तक इनके 2,117 होने का अनुमान है। एक साल पहले यह संख्या लगभग 1,760 थी। 583 ऐसे केंद्र हैं जो प्रति वर्ष 10 करोड़ डॉलर से लेकर 1 अरब डॉलर के बीच राजस्व उत्पन्न करते हैं। 423 केंद्रों का राजस्व 10 करोड़ डॉलर से कम है।
रिपोर्ट के अनुसार इसके चार मुख्य कारण हैं – देश में जीसीसी अब वितरण केंद्र से हटकर लगातार मूल्य-संचालित केंद्रों की ओर बढ़ रहे हैं, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) उत्कृष्टता केंद्रों की बढ़ती संख्या, डोमेन विशेषज्ञता वाले अधिक कुशल कार्यबल और विश्वविद्यालयों के साथ कौशल-विकास और जुड़ाव।
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा, ‘भारत का जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र बुनियादी बदलाव से गुजर रहा है। बड़े स्तर से मूल्य की दिशा में बढ़ने का काम अब अच्छी तरह से चल रहा है, जिसमें एआई उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। जीसीसी तेजी से वैश्विक उत्पादों, प्लेटफार्मों और व्यावसायिक परिणामों का स्वामित्व ले रहे हैं, जिससे भारत दुनिया भर के उद्यमों के लिए रणनीतिक तौर पर खास केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। विकास का अगला चरण इस बात से निर्धारित होगा कि ये केंद्र कितने प्रभावी ढंग से पूरे उद्यम में परिवर्तन ला सकते हैं और बड़े स्तर पर प्रभाव पैदा कर सकते हैं।’
रिपोर्ट के अनुसार भारत के तकरीबन 75 प्रतिशत जीसीसी में अगले पांच वर्षों में पोर्टफोलियो या परिवर्तनकारी हब बनने की क्षमता है। इसे साकार करने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों में कार्रवाई की आवश्यकता होगी – अधिक जटिलता वाले ऐसे कार्यों की दिशा में पोर्टफोलियो को स्थानांतरित करना, जिन्हें एआई आसानी से दोहरा नहीं सकता, एआई के साथ प्रभावी ढंग से काम करने वाले कार्यबल का निर्माण, परिचालन पैमाने के बजाय व्यावसायिक परिणामों के जरिये प्रदर्शन की पैमाइश और साझेदारों का प्रबंधन करने के बजाय उनके साथ सह-निर्माण की दिशा में बढ़ना।
इन जीसीसी से लगभग 23.6 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिनमें बेंगलूरु (34 प्रतिशत) और हैदराबाद (14 प्रतिशत) का सबसे बड़ा आधार है। इसके बाद चेन्नई और पुणे का स्थान आता है।