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IndusInd Bank: फंसे कर्ज बढ़ने से इंडसइंड बैंक का दर्द बढ़ा

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फंसे कर्ज और उच्च ऋण लागत के कारण दबाव, दूसरी तिमाही में सकल एनपीए 7,639 करोड़ रुपये पर पहुंचा

Last Updated- October 29, 2024 | 11:08 PM IST
IndusInd Bank

जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान 525 करोड़ रुपये के आकस्मिक प्रावधान की वजह से इंडसइंड बैंक का शेयर शुक्रवार को 19 प्रतिशत तक गिर गया था। मंगलवार को भी इस शेयर में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। आकस्मिक प्रावधान आमतौर पर तब किए जाते हैं जब ऋणदाता को आगामी तिमाहियों में और अधिक ऋणों के डिफाल्ट की आशंका होती है।

फंसे कर्जों यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में 1,798 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इस कारण सकल एनपीए बढ़कर 7,639 करोड़ रुपये या सकल अग्रिमों के 2.11 प्रतिशत पर पहुंच गया जो पिछली तिमाही में 2.02 प्रतिशत था।

इलारा कैपिटल ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘इंडसइंड बैंक को एक और कमजोर तिमाही का सामना करना पड़ा है, जिसमें कई मोर्चों पर दबाव है और लगातार परेशानियां दिखती हैं। एकमात्र सकारात्मक बदलाव बैलेंस शीट को मजबूत बनाने के प्रयास हैं। इसके लिए बैंक ने 5 अरब रुपये का आकस्मिक प्रावधान किया है। लेकिन कमजोर प्रदर्शन वाली तिमाही को देखते हुए फिलहाल इसके समय को लेकर सवाल उठाया जा रहा है।’

सकल एनपीए में वृद्धि पूरे उपभोक्ता बैंकिंग खातों- वाणिज्यिक वाहन, क्रेडिट कार्ड, ट्रैक्टर फाइनैंसिंग में नजर आई। ज्यादा प्रभाव माइक्रो लोन बुक यानी छोटे ऋण खातों पर पड़ा। माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशन के (एमएफआई) ऋणों में एनपीए पहली तिमाही के 1,988 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,259 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘सकल चूक 2.1 प्रतिशत तक बढ़ गई। एमएफआई सकल चूक कुल ऋणों की 5 प्रतिशत पर पहुंच गया और यह प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम रही लेकिन अन्य सेगमेंटों में इसका बढ़ना निराशा का कारण रहा।’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारा अनुमान है कि अल्पावधि में ऋण लागत ऊंची बनी रहेगी।’ इंडसइंड बैंक की ऋण लागत दूसरी तिमाही में 2.1 प्रतिशत रही जबकि इससे पिछली तिमाही में यह 1.2 प्रतिशत थी। वृद्धि के मोर्चे पर बैंक को कई तरह के अन्य दबावों का भी सामना करना पड़ा। ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 13 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 2.7 प्रतिशत रही। खासकर माइक्रोफाइनैंस में कमजोरी और वाहन ऋण पोर्टफोलियो में मंदी की वजह से ऐसा हुआ।

एमके ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘बैंक ने कुछ समय तक अपने मार्जिन को बरकरार रखा लेकिन कम ऋण जमा अनुपात (एलडीआर) और कम ब्याज प्रतिफल की वजह से यह तिमाही आधार पर 17 आधार अंक घटकर 4.08 प्रतिशत रह गया।

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First Published - October 29, 2024 | 11:08 PM IST

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