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ATF Price Hike: 1 अप्रैल से हवाई सफर महंगा? एटीएफ कीमतों में उछाल पर सरकार की बड़ी चेतावनी

एटीएफ की बढ़ती कीमतों का असर 1 अप्रैल से हवाई किरायों और एयरलाइंस संचालन पर पड़ सकता है, हालांकि सरकार यात्रियों पर बोझ कम रखने की कोशिश में जुटी है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 22, 2026 | 9:34 AM IST

ATF Price Hike: देश में एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में हवाई यात्रियों और एयरलाइंस के संचालन पर दिखाई दे सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने शुक्रवार को कहा कि एटीएफ की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं, इसलिए इसके बढ़े हुए दामों का प्रभाव 1 अप्रैल से देखने को मिल सकता है।

मीडिया से बातचीत में मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की कोशिश रहेगी कि ईंधन महंगा होने का सीधा असर यात्रियों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस मुद्दे पर एयरलाइंस के साथ लगातार संवाद कर रहा है और सभी पक्षों से फीडबैक लिया जा रहा है। यह एक बहु-विभागीय प्रक्रिया है, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ-साथ विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी शामिल हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय तनावों के बीच सुरक्षित उड़ान संचालन सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। खासकर मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत सभी आवश्यक कदम उठा रहा है ताकि यात्राएं सुरक्षित और सुचारु बनी रहें।

इस बीच, वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर भारत के एविएशन सेक्टर पर भी दिखने लगा है। जेट फ्यूल महंगा होने के कारण कई एयरलाइंस ने किरायों में अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ोतरी शुरू कर दी है। एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला लिया है। वहीं अकासा एयर ने 15 मार्च से लागू नई बुकिंग्स पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ तौर पर दिखने लगा है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, खासतौर पर उन अहम समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ा है जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रमुख है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।

हालांकि इस वैश्विक चुनौती के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर स्थिति को संतुलित बनाए रखा है। 12 मार्च को लोकसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने स्पष्ट किया कि देश इस बड़े व्यवधान के बावजूद सफलतापूर्वक स्थिति का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास गैस उत्पादन और आपूर्ति के पर्याप्त इंतजाम हैं, जो लंबे समय तक चलने वाले संकट की स्थिति में भी देश की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।

मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि देश में बिजली उत्पादन पूरी तरह सुरक्षित है और इसका असर आम उपभोक्ताओं या उद्योगों पर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, हर घर और उद्योग के लिए बिजली की आपूर्ति निर्बाध बनी हुई है।

ईंधन की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है। मंत्री ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एविएशन टर्बाइन फ्यूल और फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है। इन सभी उत्पादों की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और देशभर में उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारतीय रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। कई मामलों में इनका उत्पादन स्तर 100 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुंच रहा है, जिससे घरेलू मांग को पूरा करने में किसी तरह की बाधा नहीं आ रही है।

LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति में कमी के कारण देश में रसोई गैस संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने राहत देते हुए व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 21 मार्च के आदेश के अनुसार राज्यों को अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कुल आवंटन अब आधा हो जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त आवंटन उन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा, जो सीधे तौर पर आम लोगों की जरूरतों से जुड़े हैं। इनमें रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सस्ते भोजन केंद्र, सामुदायिक रसोई और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर भी इस दायरे में रखे गए हैं।

सरकार ने व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। अतिरिक्त एलपीजी पाने के लिए उन्हें अपने शहर की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के लिए आवेदन करना होगा। साथ ही तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इन कंपनियों को उपभोक्ताओं के कार्यक्षेत्र और उनकी वार्षिक एलपीजी खपत का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।

सरकार का कहना है कि जो उपभोक्ता भविष्य में पीएनजी अपनाने के लिए तैयार होंगे, उन्हें ही बढ़े हुए एलपीजी आवंटन का लाभ मिलेगा। इसका उद्देश्य धीरे धीरे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को एलपीजी से हटाकर पाइप्ड गैस की ओर ले जाना है, ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।

दरअसल, मौजूदा संकट के चलते सरकार ने पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी थी और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी आपूर्ति में भारी कटौती की गई थी। शुरुआत में व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत मासिक जरूरत का केवल 20 प्रतिशत ही आवंटित किया गया था। बाद में जिन राज्यों ने पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए सुधारों का वादा किया, उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन दिया गया।

भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में क्षेत्र में जारी युद्ध का सीधा असर भारत की गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है।

सरकार अब उपभोक्ताओं को तेजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट करने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट का प्रभाव कम किया जा सके और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाया जा सके।

-एजेंसी इनपुट के साथ

First Published : March 22, 2026 | 9:34 AM IST