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बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: चीनी निर्यातकों को मिलेगा रॉडटेप का लाभ

अदालत ने केंद्र सरकार की विभिन्न उच्च न्यायालयों में अपनाई जा रही असंगत मुकदमेबाजी की रणनीति के कारण पैदा होने वाली ‘न्यायिक अराजकता’ जैसी स्थिति पर भी चिंता जताई।

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मोनिका यादव   
Last Updated- April 23, 2026 | 8:31 AM IST

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने निर्यातकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर विनियमित जिंसों के निर्यातकों पर पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि जिन चीनी निर्यातकों को सरकार से विशेष अनुमति और आवंटित कोटे के साथ चीनी निर्यात करने की अनुमति मिली थी उन्हें निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की वापसी (रॉडटेप) योजना का लाभ मिलता रहेगा भले ही चीनी के निर्यात को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया हो। रॉडटेप एक सरकारी योजना है जो निर्यात की गई वस्तुओं पर लगे अप्रत्यक्ष शुल्कों और करों को वापस करती है, ताकि भारतीय सामान वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।

अदालत ने केंद्र सरकार की विभिन्न उच्च न्यायालयों में अपनाई जा रही असंगत मुकदमेबाजी की रणनीति के कारण पैदा होने वाली ‘न्यायिक अराजकता’ जैसी स्थिति पर भी चिंता जताई। इसने केंद्रीय व्यापार एवं कर कानूनों में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट ‘राष्ट्रीय मुकदमा नीति’ की आवश्यकता पर जोर दिया।

20 अप्रैल को दिए गए एक संयुक्त फैसले में, एक खंडपीठ ने प्रमुख चीनी निर्यातकों जैसे रिका ग्लोबल इम्पैक्स, श्री रेणुका शुगर्स, के.एस. कमोडिटीज और उमा एक्सपोर्ट्स द्वारा दायर रिट याचिकाओं के एक समूह को स्वीकार कर लिया। अदालत ने यह माना कि राजस्व विभाग द्वारा रॉडटेप लाभों से इनकार करना मनमाना था।

एक बार जब सरकार ने खुद मई 2022 की अधिसूचना के बाद, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के तहत निदेशालय द्वारा तय कोटा प्रणाली के जरिए निर्यात की इजाजत दे दी थी, तो केवल इस आधार पर उन शिपमेंट को प्रोत्साहन योजना से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि चीनी को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया था।

दरअसल विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने मई 2022 में चीनी (कच्ची, रिफाइंड और सफेद चीनी) के निर्यात को मुक्त श्रेणी से ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया था। ऐसा देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए किया गया था। हालांकि, इसी अधिसूचना में यह भी कहा गया था कि खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) से विशेष अनुमति लेकर निर्यात किया जा सकता है।

कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस अनुमति और निर्धारित कोटे के तहत चीनी का निर्यात किया और सभी शर्तें पूरी कीं। उन्होंने रॉडटेप योजना के तहत मिलने वाले लाभ का भी दावा किया। हालांकि सीमा शुल्क अधिकारियों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि निर्यात के लिए चीनी ‘प्रतिबंधित’ वस्तु है, इसलिए वह रॉडटेप योजना के दिशानिर्देशों के तहत लाभ पाने की हकदार नहीं है।

First Published : April 23, 2026 | 8:31 AM IST