उद्योग

पश्चिम एशिया संकट के बीच CII ने वित्त मंत्रालय से मांगी मदद, MSME के लिए ‘इमरजेंसी लोन’ की गुहार

सीआईआई ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय को 20-सूत्रीय सुझाव दिए हैं, जिसमें निर्यातकों और एमएसएमई के लिए वित्तीय राहत की मांग की गई है

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रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- April 05, 2026 | 10:34 PM IST

उद्योग ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच वित्त मंत्रालय को कई सुझाव दिए हैं। इसके तहत उद्योग ने महामारी के दौरान लागू योजना की तर्ज पर समयसीमा के साथ संघर्ष-संबंधी आपातकालीन ऋण, ऊर्जा इनपुट पर कर व शुल्क ढांचे का युक्तिकरण और केंद्रीय व राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों  के अनुबंधों के लिए डिलीवरी समयसीमा के विस्तार के सुझाव दिए हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार को 20-सूत्रीय नीति एजेंडा प्रस्तुत किया है। इसमें  वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति के लिए राजकोषीय, वित्तीय और व्यापारिक कार्रवाई की मांग की गई है। दरअसल, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के निर्यातक और ऊर्जा-गहन उद्योग इस संकट की मार झेल रहे हैं।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘बीते संकटों से भारत के अनुभव से पता चला है कि समन्वित राजकोषीय और मौद्रिक कार्रवाई मजबूती को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है। नीतिगत प्रतिक्रिया के अगले चरण में लक्षित नकदी समर्थन, ऋण सुविधा, व्यापार लागत प्रबंधन और विदेशी मुद्रा स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत हो सकती है।”

उद्योग मंडल ने सिफारिश की है कि सरकार समर्थित गारंटी के जरिए अतिरिक्त गिरवी मुक्त कार्यशील पूंजी का विस्तार प्रभावित उद्योग को किया जाए। इस क्रम में विशेष रूप से एमएसएमई, निर्यातकों और गैस आधारित क्षेत्रों को यह सुविधा दी जाए। सीआईआई ने सुझाव दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक को संकट के मद्देनजर एमएसएमई में विशेष रूप से निर्यातकों और निर्यात आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी सहायक इकाइयों को अस्थायी व स्पष्ट रूप से तीन महीने की मोहलत और रिस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) विंडो व विशेष पुनर्वित्त (रिफाइनैंस) विंडो पर कार्य करना चाहिए। 

इसने व्यवधान अवधि के दौरान बढ़ते इनपुट लागतों को प्रबंधित करने में मदद के लिए बिजली शुल्क में अस्थायी राहत और ऋण प्रसंस्करण शुल्क, विदेशी मुद्रा लेन देन शुल्क और दस्तावेज़ीकरण लागत सहित प्रशासनिक बैंकिंग शुल्कों में अस्थायी कमी या छूट की भी मांग की  गई है।

सीआईआई ने कहा कि वित्त मंत्रालय ऊर्जा इनपुट पर कर और शुल्क संरचना की समयसीमा के साथ युक्तिकरण करने पर भी विचार कर सकता है ताकि एलएनजी आयात पर 2.5% सीमा शुल्क की अस्थायी छूट सहित व्यवधान के कारण होने वाले बढ़ते लागत प्रभावों को कम किया जा सके। सरकार ने 27 मार्च को तेल कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की थी। इसमें उपभोक्ताओं को मूल्य वृद्धि से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क कम किया गया था।

सरकार ने घरेलू बाजार में इन ईंधनों की पर्याप्त उपलब्धता तय करने के लिए डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन पर निर्यात शुल्क फिर से लागू किया था। डीजल निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ निर्यात पर शून्य से बढ़ाकर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है।

वित्त मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के जवाब में 2 अप्रैल, 2026 को महत्त्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट की घोषणा की।

उद्योग मंडल ने तेल और गैस सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप विंडो पर विचार करने का सुझाव दिया है। इससे उन्हें अमेरिकी डॉलर की आवश्यकताओं को ऐसे पूरा करने में मदद मिल सके जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता कम हो और भंडार पर अनुचित दबाव सीमित हो।

सीआईआई ने सिफारिश की है, ‘मध्यम अवधि में निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम में स्थायी रूप से संघर्ष से जुड़ी निर्यात जोखिम समर्थन सुविधा स्थापित की जा सकती है। इसमें पूर्व-निर्धारित सक्रिय मानदंड व मानकीकृत समर्थन पैरामीटर होंगे। इसमें भू-राजनीतिक व्यवधानों के दौरान समय पर जोखिम कवरेज प्रदान किया जा सकेगा।’ 

सीआईआई ने पहले ही एमएसएमई सचिव को पत्र लिखा था। इसमें मध्य पूर्व एशिया में विकसित हो रही भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण शिपिंग और लॉजिस्टिक्स संचालन में महत्त्वपूर्ण व्यवधानों को उजागर किया गया था। एमएसएमई क्षेत्र को मदद मुहैया कराने के लिए कच्चे माल के वैकल्पिक स्रोतों, गैस आपूर्ति की उपलब्धता पर स्पष्टता और बंदरगाह भंडारण पर अस्थायी छूट या राहत की मांग की गई थी। उद्योग मंडल ने लॉजिस्टिक व्यवधानों, बढ़ते माल ढुलाई खर्चे व बीमा लागतों और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण एमएसएमई की कार्यशील पूंजी पर दबाव से संबंधित कई उभरती चिंताओं पर जोर दिया था।

सीआईआई ने नवीनतम बयान में कहा कि सरकार को इनवाइस छूट को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रभावित औद्योगिक समूहों में व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली प्लेटफॉर्म का अधिक सक्रिय विस्तार करना चाहिए। इस क्रम में सरकार को लंबित जीएसटी रिफंड, सीमा शुल्क वापसी दावों और आरओडीटीईपी बकाए का तेजी से निपटान भी करना चाहिए।

First Published : April 5, 2026 | 10:34 PM IST