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कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 15वें दौर की शुरुआत की। इसमें 17 ब्लॉकों की पेशकश की गई है। इनमें 11 ब्लॉक नए हैं, जबकि 6 ब्लॉक ऐसे हैं, जिनकी पेशकश दोबारा की गई है। इस नीलामी का मकसद घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देना है।
नीलामी के 15वें दौर के 11 ब्लॉकों में से 7 पूरी तरह से खोजे गए हैं और 4 आंशिक रूप से खोजे गए हैं। कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 3 खदानें और खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत 8 खदानें पेश की जा रही हैं।
मंत्रालय ने कहा कि इन ब्लॉकों में 1 कोकिंग कोल खदान और 10 गैर कोकिंग कोल खदानें शामिल हैं, जिनके कोयले का इस्तेमाल स्टील और बिजली जैसे क्षेत्रों में होता है। खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में हैं।
इस नीलामी की शुरुआत आत्मनिर्भर भारतः ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला नाम के परामर्श से हुई, जिसमें नीति निर्माता, उद्योग के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ एक मंच पर आए और उन्होंने सुधारों, तकनीक और इस सेक्टर की सततता पर चर्चा की।
भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन 2020 में निजी क्षेत्र के लिए खोला गया था, जो एक प्रमुख सुधार था। इसकी वजह से निजी खननकर्ता अंतिम उपयोग के प्रतिबंधों के बिना कोयले का खनन और बिक्री कर सकते हैं। ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से आयोजित नीलामी पर आधारित ढांचे ने तब से स्थापित कंपनियों और नए आने वालों को आकर्षित किया है। इससे कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, दक्षता और आत्मनिर्भरता आ रही है।
कोयला क्षेत्र को खोलने के बाद वाणिज्यिक और कैप्टिव कोयला खनन में काफी वृद्धि हुई है और घरेलू आपूर्ति बढ़ी है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन खदानों से वित्त वर्ष 2026 में पहली बार 20 करोड़ टन उत्पादन का आंकड़ा पार किया और 21 करोड़ टन उत्पादन हुआ।