प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भव्य स्टेडियम शोज और बड़े पैमाने पर होने वाली लक्जरी डेस्टिनेशन वेडिंग्स (शाही विवाह समारोहों) ने देश के प्रोफेशनल ऑडियो, विजुअल और लाइटिंग उद्योग को पंख लगा दिए हैं। भारत में कॉन्सर्ट इकोनॉमी का तेजी से विस्तार हो रहा है। बड़े शहरों से निकलकर अब यह उद्योग छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच गया है। इससे पूरी लाइव इवेंट्स इंडस्ट्री के आने वाले कुछ वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने का अनुमान है, जबकि भारत का घरेलू प्रो-एवी (Pro-AV) बाजार 2034 तक 150 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
मुंबई में चल रहे पाम एवी-आइसीएन एक्सपो 2026 (PALM AV-ICN Expo 2026) के 24वें संस्करण में शामिल उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि भारत अब केवल वैश्विक मनोरंजन के रुझानों का उपभोक्ता नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय टूरिंग प्रोडक्शंस और अत्याधुनिक हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। इस क्षेत्र के मजबूत आर्थिक आंकड़े उद्योग की सफलता और तेज गति को दर्शाते हैं। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए बनीं अनुकूल राष्ट्रीय नीतियों के कारण इस बहु-क्षेत्रीय विकास को और गति मिली है।
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मेगा साउंड इंडिया के संस्थापक और एमडी सिद्धार्थ चौहान ने बताया कि उदयपुर और जयपुर जैसे सांस्कृतिक केंद्रों में होने वाले शाही विवाह समारोह अब बहु-दिवसीय आयोजनों और 25 से अधिक कलाकारों की उपस्थिति के साथ ‘मिनी-फेस्टिवल्स’ में बदल गए हैं। इसके कारण अकेले राजस्थान का वेडिंग मार्केट 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है।
पाम एक्सपो के संस्थापक निदेशक अनिल चोपड़ा ने कहा कि स्टेडियम-स्केल कॉन्सर्ट इकोनॉमी ने हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म क्षेत्र में एक बड़ा मल्टीप्लायर इफेक्ट पैदा किया है, जहां अब भारतीय कलाकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी बुनियादी ढांचे की मांग कर रहे हैं। प्रीमियम विजुअल अनुभवों की लगातार बढ़ती मांग के कारण भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एकाधिकार के सामने एक सक्षम विकल्प पेश कर रहा है।
भारत का एलईडी डिस्प्ले मार्केट वर्तमान में लगभग 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और यह 15% की वार्षिक गति से बढ़ रहा है, जिसमें रेंटल एलईडी सेगमेंट की हिस्सेदारी ही लगभग 650 करोड़ रुपये की है।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर 90% से अधिक एलईडी उत्पादन चीन में केंद्रित है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण भारत को एक विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने का बड़ा अवसर मिला है। 1 लाख वर्ग फुट की घरेलू उत्पादन इकाई और आगामी समय में नेक्स्ट-जनरेशन ‘चिप-ऑन-बोर्ड’ तकनीक में निवेश के बल पर भारतीय कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के जोखिम को तेजी से कम कर रही हैं।
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि स्मार्ट वेन्यू और अनुभवात्मक उपभोग (experiential consumption) के कारण यह उद्योग हाई-ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रहा है। इसमें अकेले एंटरटेनमेंट लाइटिंग सेक्टर का आकार 9% सीएजीआर (CAGR) की मजबूत गति के साथ साल 2031 तक 12.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 18 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है।
इन्फॉर्मा मार्केट्स द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में 285 से अधिक प्रदर्शक और 1,000 से अधिक अग्रणी वैश्विक व घरेलू ब्रांड्स एक साथ आए हैं। इनमें हरमन (जिसमें जेबीएल और मार्टिन प्रोफेशनल शामिल हैं), यामाहा कॉर्पोरेशन, सेनहाइजर, श्योर, एप्सन, अहुजा रेडियो, एल-अकौस्टिक्स और हिकविजन जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। 42,000 से अधिक उद्योग पेशेवर, सिस्टम इंटीग्रेटर्स और कंसल्टेंट्स इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। इसी दौरान भविष्य की तकनीकी क्रांतियों तथा बदलती पद्धतियों पर चर्चा करने के लिए 50 से अधिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में तीन दिवसीय उच्च स्तरीय सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है।