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Debt recovery: बैंकों पर कर्ज वसूली का बोझ, निपटाने में लगेंगे 7 साल, सरकार बढ़ाएगी ताकत

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पिछले साल कर्ज वसूली के लिए अदालतों में बहुत सारे मामले गए। इन मामलों की कुल कीमत 4 लाख 2 हजार करोड़ रुपये थी, जो कि पिछले साल के 69000 करोड़ से बहुत ज्यादा है।

Last Updated- July 30, 2024 | 4:19 PM IST
Investment bankers made a huge profit of Rs 1,000 crore, the biggest record since 2000 निवेश बैंकरों ने की 1,000 करोड़ रुपये की तगड़ी कमाई, साल 2000 के बाद बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

भारतीय बैंकों के बहुत सारे ऐसे कर्जदार हैं जिन्होंने कर्ज नहीं चुकाया है। इन मामलों को सुलझाने में बैंकों को काफी दिक्कत हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी मामलों को सुलझाने में करीब सात साल लग सकते हैं। इस समय लगभग 2 लाख से ज्यादा ऐसे मामले हैं जो अभी तक सुलझे नहीं हैं। हर साल इनमें से सिर्फ 30 से 40 हजार मामले ही सुलझ पाते हैं। साल 2017 से 2022 के बीच कुल 1 लाख 45 हजार मामले सुलझे हैं।

सरकार इस समस्या को हल करने के लिए कोशिश कर रही है। उसने हाल ही में बजट में कुछ बदलाव किए हैं जिससे इन मामलों को जल्दी से सुलझाया जा सके। सरकार ने तय किया है कि इन मामलों को सुनने वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे उम्मीद है कि ये मामले जल्दी से सुलझ सकेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो सरकार ने ऋण वसूली अधिकरणों (डीआरटी) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरणों (एनसीएलटी) दोनों की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

बिजनेस डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस समय 39 ऋण वसूली अधिकरण (DRT) और 5 ऋण वसूली अपील अधिकरण (DRAT) हैं। लेकिन इनके पास बहुत ज्यादा मामले हैं। हर साल लगभग 60,000 नए मामले आते हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 30,000 से 40,000 ही सुलझ पाते हैं।

एक कानून है जिसका नाम दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) है। इस कानून के तहत अब तक 1000 से ज्यादा कंपनियों के मामले सुलझे हैं और कर्जदारों को करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये वापस मिले हैं। इसके अलावा इस कानून के तहत ही 28,000 से ज्यादा ऐसे मामले भी सुलझे हैं जिनकी कुल कीमत 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।

हालांकि, इन अदालतों में सुधार करने के बावजूद भी ऋण वसूली के मामले धीरे-धीरे ही सुलझ पा रहे हैं। एक दूसरा कानून है जिसका नाम सुरक्षाकरण और पुनर्निर्माण वित्तीय परिसंपत्तियां और सुरक्षा हित प्रवर्तन (SARFAESI) अधिनियम है।
इस कानून के तहत बैंक बिना अदालत गए ही कर्ज वसूल सकते हैं। इस तरीके से कर्ज वसूली ज्यादा तेजी से हो पाती है।

पिछले साल यानी 2023 में बैंकों को कर्ज वसूली में काफी दिक्कत हुई। हालांकि, पिछले साल कर्ज वसूली के लिए अदालतों में बहुत सारे मामले गए। इन मामलों की कुल कीमत 4 लाख 2 हजार करोड़ रुपये थी, जो कि पिछले साल के 69000 करोड़ से बहुत ज्यादा है। लेकिन इन मामलों से बैंकों को सिर्फ 9.2% ही पैसा वापस मिला, जबकि पिछले साल उन्हें 17.5% पैसा वापस मिला था।

इससे बैंकों को बैड लोन से वापस मिलने वाला पैसा भी कम हो गया। पिछले साल उन्हें 17.6% पैसा वापस मिला था, लेकिन इस साल सिर्फ 15% ही मिल पाया। हालांकि, एक दूसरे तरीके से, जिसका नाम दिवाला कानून (IBC) है, उससे बैंकों को इस साल 40% से ज़्यादा पैसा वापस मिल गया, क्योंकि पिछले दो सालों में इस तरीके से कम पैसा वापस मिला था।

इसके अलावा, बैंकों ने पिछले साल (वित्त वर्ष 23 में) बहुत सारे बैड लोन एसेट कंस्ट्रक्शन कंपनी को बेच दिए। एक नई कंपनी (NARCL) बनी थी जिसने बहुत सारे बैड लोन खरीदे। पिछले साल बैंकों ने अपने पुराने बैड लोन में से लगभग 9.7% हिस्सा इस कंपनी को बेच दिया, जबकि उसके एक साल पहले उन्होंने सिर्फ 3.2% हिस्सा बेचा था।

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First Published - July 30, 2024 | 4:19 PM IST

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