उद्योग

जेनेरिक दवाओं को पीछे छोड़ेंगे बायोसिमिलर, अमेरिकी बाजार के लिए डॉ. रेड्डीज लैब का बड़ा मास्टरप्लान

डॉ. रेड्डीज लैब सेमाग्लूटाइड, बायोसिमिलर और ऑन्कोलॉजी दवाओं के दम पर अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं से आगे निकलकर वैश्विक स्तर पर बड़ा विस्तार करने की तैयारी में है

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अंजलि सिंह   
संकेत कौल   
Last Updated- May 19, 2026 | 9:51 PM IST

डॉ. रेड्डीज लैब विकास के अगले दौर के लिए खुद को तैयार कर रही है। अपनी ग्लोबल सेमाग्लूटाइड की रणनीति, बायोसिमिलर और पेप्टाइड में विस्तार की योजनाओं तथा पारंपरिक जेनेरिक दवाओं से आगे उत्तर अमेरिका के अपनी कारोबारी कार्ययोजना के जरिये वह ऐसा कर रही है। अंजलि सिंह और संकेत कौल के साथ वीडियो बातचीत के दौरान मुख्य कार्य अ​धिकारी यह एरेज इजरायली ने यह जानकारी दी। संपादित अंश …

दुनिया भर के बाजारों में जब सेमाग्लूटाइड के कई संस्करण हैं, तो इस श्रेणी में डॉ. रेड्डीज की रणनीति किस तरह अलग है और यह मौका कितना अहम है?

सेमाग्लूटाइड जैसी दवाओं में हमारी प्रतिस्पर्धी बढ़त चार मुख्य श​क्तियों से आती है। ये हैं- कई बाजारों में सबसे पहले शुरुआत करने वालों में शामिल होना, जल्द बड़ा स्तर हासिल करना, दमदार वैज्ञानिक क्षमताएं विकसित करना और अपने वै​श्विक बाजार नेटवर्क का लाभ उठाना। 80 ​​से ज्यादा बाजारों में हमारी मौजूदगी हमें प्रतिस्पर्धियों से पहले डॉक्टरों, मरीजों और खुदरा विक्रेताओं से जुड़ने का मौका देती है।

हमारा स्तर और बैकवर्ड इंटीग्रेशन हमें लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करता है क्योंकि समय के साथ-साथ कीमतें तय करने का दबाव बढ़ता जाता है। हम फॉर्म्युलेशन, उपकरणों और ओरल संस्करणों में लगातार नवाचार को भी अहम अंतर के तौर पर देखते हैं। हमारी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी, स्थानीय बाजार में विशेषज्ञता और पूंजी तक पहुंच हमें ऐसे बाजार में मजबूती से स्थापित करती है जिनमें बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत है।

सेमाग्लूटाइड की तादाद के लिए आप जो लक्ष्य बना रहे हैं, उसका कोई संकेत?

हम अब भी कुछ लाख यूनिट वाले बाजार स्तर पर काम कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से पूरे उद्योग में क्षमता की कमी के कारण सीमित है। हमें उम्मीद है कि साल 2026 के अंत तक ये सीमाएं कम हो जाएंगी। अगले दो से तीन साल के दौरान जैसे-जैसे विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी और ज्यादा बाजार खुलेंगे, सेमाग्लूटाइड के लिए कई अरब डॉलर का बाजार बन सकता है। जैसे-जैसे मात्रा बढ़ेगी, कीमतों में नरमी की उम्मीद है। इससे विनिर्माण स्तर तथा लागत दक्षता और अहम हो जाएगी।

आप जो लक्ष्य तय कर रहे हैं, उसके मद्देनजर क्या आपको आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण क्षमता, असेंबली या कोल्ड-चेन के बुनियादी ढांचे में कोई चुनौतियां दिख रही हैं?

हमें अपनी इस क्षमता पर पूरा भरोसा है कि जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी, हम उत्पादन बढ़ा लेंगे और बाजार को आपूर्ति कर सकेंगे।

लेनालिडोमाइड (कैंसर के इलाज में इस्तेमाल ओरल इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवा) के बाद उत्तर अमेरिका के लिए आपकी क्या रणनीति है?

अमेरिका का कारोबार पारंपरिक जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़कर विविध पोर्टफोलियो में बदल रहा है। इसे बायोसिमिलर, उपभोक्ता स्वास्थ्य और आखिरकार नवाचार वाली दवाएं आगे बढ़ा रही हैं। जेनेरिक दवाएं उत्पादों के बड़े स्तर पर उत्पादन और वैश्विक स्तर पर शुरुआत के लिए अहम बनी रहेंगी। तुलनात्मक रूप से कम आधार तथा बड़ी संख्या में शुरुआत के कारण इनमें दो अंकों में वृद्धि होगी। बायोसिमिलर में बड़ा अवसर है, खासकर चिकित्सा लाभ वाले उत्पादों में, जहां कीमतों का दबाव कम होता है और भुगतान करने वालों की गतिवि​धियां बाजार हिस्सेदारी तय करती हैं।

हमें उम्मीद है कि बायोसिमिलर विकास का महत्त्वपूर्ण इंजन बन जाएंगे और संभवतः साल 2030 के दशक की शुरुआत तक जेनेरिक दवाओं से आगे निकल जाएंगी।

अमेरिका में सेमाग्लूटाइड के अलावा क्या कोई ऐसे विशिष्ट चिकित्सीय क्षेत्र हैं जिनमें आप अग्रणी स्थिति चाहते हैं?

वैश्विक स्तर पर ऑन्कोलॉजी वह चिकित्सीय क्षेत्र है, जिसमें हमारी सबसे अधिक रुचि है। यह अभी भी ऐसी सबसे बड़ी चिकित्सा चुनौतियों में से एक है, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है। हम भारत जैसे बाजारों में जो भी नवाचार ला रहे हैं, उसका अधिकांश हिस्सा ऑन्कोलॉजी पर ही केंद्रित है। हमें उम्मीद है कि समय के साथ-साथ ऑन्कोलॉजी भारत और वैश्विक स्तर दोनों ही जगह हमारा सबसे ज्यादा जोर वाला क्षेत्र बन जाएगा।

First Published : May 19, 2026 | 9:51 PM IST