उद्योग

एल्युमीनियम उद्योग की वै​श्विक संकट ने और बढ़ाई मु​श्किलें, सरकार ने दिया बाधांए दूर करने का भरोसा

केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस उद्योग को आशियान देशों के साथ एफटीए के कारण सस्ते आयात से हो रही परेशानी को दूर करने का दिया भरोसा

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- April 07, 2026 | 7:20 PM IST

Aluminium Industry Crises: पहले से सस्ते आयात से जूझ रहे एल्युमीनियम उद्योग की पश्चिम एशिया संकट ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस संकट के कारण उद्योग की उत्पादन लागत और बढ़ गई है। साथ ही ईंधन अपूर्ति बाधित होने से उत्पादन में कमी आई है। संकट से जूझ रहे इस उद्योग को केंद्र सरकार से मदद करने का भरोसा मिला है। एल्युमीनियम एक्सट्रुजन मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) ने आज सितंबर में ‘एल्युमीनियम भारत’ पहल की घोषणा की है। इसका उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया।

क्षमता से काफी कम हो रहा है उत्पादन

ALEMAI के अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा ने कहा कि भारत का मिडस्ट्रीम (जहां प्राथमिक एल्युमीनियम जैसे इंगट/मोल्टन मेटल को ढालकर सेमी फिनिश्ड रूप दिया ) और डाउनस्ट्रीम (वह हिस्सा है जहां प्राथमिक एल्युमीनियम (इंगट/बिलेट/स्लैब) को आगे प्रोसेस करके उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं) एल्युमीनियम सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। इस सेक्टर में देश की कुल उत्पादन क्षमता 42 लाख टन है, जबकि क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि एक्सट्रूजन यूनिट की उत्पादन क्षमता करीब 30 लाख टन है, लेकिन इनमें उत्पादन महज 12 से 13 लाख टन ही हो रहा है। इन यूनिट में क्षमता से कम उत्पादन की वजह सस्ता आयात है। ऐसा खासकर आशियान देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के कारण हो रहा है। ऐसे में सरकार को इस एफटीए के बारे में घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखकर सोचना चाहिए।

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एक्सट्रूजन यूनिट में एल्युमीनियम बिलेट को डाई से दबाकर अलग-अलग आकार के प्रोफाइल/सेक्शन बनाए जाते हैं, जिन्हें आगे निर्माण, ऑटो, सोलर, इलेक्ट्रिकल और इंटीरियर जैसे क्षेत्रों में सीधे इस्तेमाल किया जाता है। ALEMAI के महासचिव अंकुर अग्रवाल ने कहा कि भारत में एल्युमीनियम स्कैप की भी कमी है। जिससे यहां कच्चे माल की लागत दुनिया सबसे अधिक है।

पश्चिम एशिया संकट से और बढ़ेगी मुश्किलें

पहले से संकट से जूझ रहे एल्युमीनियम उद्योग को पश्चिम एशिया संकट ने और मुश्किल में डाल दिया है। चोपड़ा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से उत्पादन लागत 20 से 25 फीसदी बढ़ गई है। स्क्रैप की भी कमी हो गई है। ऐसे में उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि आगे यह संकट दूर होने पर हालात सुधरने की उम्मीद है। एल्युमीनियम उद्योग 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है।

एल्युमीनियम उद्योग को राहत का भरोसा

ALEMAI द्वारा आज आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एल्युमीनियम उद्यमियों को उनके हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिलाया। प्रसाद ने आशियान देशों के साथ एफटीए से इस उद्योग को हो रही परेशानी पर कहा कि सरकार आशियान देशों के साथ एफटीए की समीक्षा कर रही है। इसमें एल्युमीनियम उद्योग को हितों को ध्यान रखा जाएगा। सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण एमएसएमई की बाधाएं दूर करने का प्रयास कर रही है।

प्रसाद ने कहा कि सरकार सुविधाएं तो दे सकती है। लेकिन उद्यमियों को भी प्रतिस्पर्धी बनना होगा और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। सरकार सेमिकंडक्टर सेक्टर पर खासा जोर दे रही है और इसमें एल्युमीनियम का अहम योगदान है।

First Published : April 7, 2026 | 7:20 PM IST