Ethanol Blending Tax Levy: केंद्र सरकार ने पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे नए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) से छूट देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब E20 से ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन को बाजार में लाने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार ने चार नए तरह के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को एक्साइज ड्यूटी छूट के दायरे में शामिल किया है।
इन सभी ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी शून्य रहेगी, बशर्ते वे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तय मानकों को पूरा करते हों।
सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और देश में बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से देश का आयात बिल कम होगा और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ी है। सरकार के मुताबिक, देश की कुल एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब करीब 20 से 21 अरब लीटर सालाना हो चुकी है। वहीं मौजूदा E20 कार्यक्रम के लिए सालाना करीब 10 से 12 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होती है। यानी देश में उत्पादन क्षमता मांग से कहीं ज्यादा है।
फिलहाल ज्यादातर वाहन मालिकों पर इसका तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कारण यह है कि E22, E25, E27 और E30 जैसे ईंधन सिर्फ उन्हीं वाहनों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिन्हें 20 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो। आज सड़कों पर चल रही अधिकांश पेट्रोल गाड़ियां E20 तक के ईंधन के लिए बनी हैं। ऐसे में ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में E85 ईंधन भी लॉन्च किया गया है। E85 में 85 फीसदी एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 5 जून को E85 लॉन्च किया था। यह ईंधन खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है।
सरकार के मुताबिक, E85 की कीमत E20 के मुकाबले करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम होगी। फिलहाल देशभर के 48 पेट्रोल पंपों पर इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है। सरकार की योजना 2026 के अंत तक 500 और 2027 के अंत तक 5,000 E85 स्टेशन शुरू करने की है।