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West Asia Crisis: MSMEs को मिलेगी बड़ी राहत! सरकार ला सकती है ₹2.5 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना

प​श्चिम ए​शिया संघर्ष से प्रभावित कारोबार को मिलेगा सपोर्ट, 90 फीसदी तक की मिलेगी क्रेडिट गारंटी

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एजेंसियां   
Last Updated- April 07, 2026 | 12:29 PM IST

MSME Support Scheme 2026: पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना पर सरकार विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों, खासकर MSME के लिए, 2.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना पर विचार कर रही है।

MSME Support Scheme 2026 के तहत, अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते बारोअर्स द्वारा डिफॉल्ट होने की स्थिति में 100 करोड़ रुपये तक के लोन पर करीब 90 फीसदी तक की क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। बैंक लोन पर यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) द्वारा दी जाएगी, जो सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इस योजना के लिए सरकार को लगभग 17,000 करोड़ रुपये से 18,000 करोड़ रुपये तक का प्रावधान करना होगा।

सूत्रों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान यह योजना काफी सफल रही थी और इससे विभिन्न क्षेत्रों के कई व्यवसायों को टिके रहने और अपने बकाये चुकाने में मदद मिली थी।

मई 2020 में आई थी ECLGS योजना

सरकार ने मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) की घोषणा की थी, जिसका मकसद पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और अन्य पात्र बिजनेस को उनकी परिचालन जरूरतों को पूरा करने और कोविड-19 के कारण बाधित व्यवसायों को फिर से शुरू करने में सहायता देना था।

ECLGS ने अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों को कवर किया था और इसके तहत पात्र बारोअर्स को दिए गए लोन पर सदस्य लेंडर संस्थानों (MLIs) को 100 फीसदी गारंटी प्रदान की गई थी।

इस योजना की संरचना ऐसी थी कि लोन आसानी से उपलब्ध हो सके, क्योंकि बैंक बारोअर्स के मौजूदा बकाये के आधार पर पहले से स्वीकृत लोन देते थे और इसके लिए कोई नया वैल्यूएशन नहीं किया जाता था।

इसके अलावा, ब्याज दरों पर भी सीमा तय की गई थी ताकि लोन की लागत कम रहे और बिना किसी प्रोसेसिंग शुल्क, प्री-पेमेंट शुल्क और गारंटी शुल्क के लोन उपलब्ध कराया गया। यह योजना 31 मार्च 2023 तक जारी रही।

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सरकार ने हाल में उठाए कई कदम

इसके अलावा, सरकार ने हाल के दिनों में आम लोगों की परेशानी कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती शामिल है। भारत ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम किया है और महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर छूट दी है, साथ ही एसईजेड को घरेलू शुल्क क्षेत्र में संचालन की अनुमति दी है।

सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, ताकि बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव से उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की।

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डीजल और ATF पर लगा निर्यात शुल्क

सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (ATF) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह फिलहाल शून्य है।

2 अप्रैल को भारत ने पश्चिम एशिया संकट के कारण शिपिंग मार्गों में बाधा के बीच आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क से छूट दी। कच्चे तेल के अलावा, भारत उर्वरक और प्राकृतिक गैस का भी बड़ा आयातक है।

First Published : April 7, 2026 | 12:29 PM IST