प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद से देश की हेलमेट कंपनियों की विनिर्माण लागत में लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। ब्रेंट क्रूड से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की वजह से ऐसा हुआ है। इस कारण संगठित कंपनियों को हेलमेट की कीमतें 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ानी पड़ी हैं, जबकि इस लागत वृद्धि का बड़ा हिस्सा उन्होंने ही वहन किया है। स्टीलबर्ड हाई-टेक इंडिया के प्रबंध निदेशक राजीव कपूर ने आज यह जानकारी दी। वह हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं।
कपूर ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ के साथ बातचीत में कहा, ‘संगठित उद्योग ने हेलमेट की कीमतों में केवल 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लागत में इससे कहीं ज्यादा वृद्धि हुई है। हर कोई जानता है कि युद्ध समाप्त होगा, तो कीमतों में गिरावट आएगी। यही वजह है कि कंपनियों ने कीमतों में केवल नाममात्र की बढ़ोतरी की है।’
कपूर ने कहा कि संगठित हेलमेट उद्योग इसके साथ-साथ एक और बड़ी चुनौती से जूझ रहा है और वह है ‘नकली हेलमेट।’ उनके अनुसार देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 50 प्रतिशत हेलमेट नकली हैं, भले ही उनमें से कई पर बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) का प्रमाणन चिह्न ही क्यों न लगा हो। उन्होंने कहा, ‘भारत में ऐसी 200 से अधिक कंपनियां हैं जो नकली हेलमेट बनाती हैं और उनके पास सरकार का लाइसेंस भी है।’
उन्होंने आरोप लगाया कि लाइसेंस होने के बावजूद ऐसे कई विनिर्माता कबाड़ (स्क्रैप) सामग्री का इस्तेमाल करते हैं और ऐसे हेलमेट बनाते हैं जो असल बीआईएस सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं होते हैं। कपूर ने दावा किया कि इनमें से अधिकांश इकाइयां दिल्ली के किराड़ी गांव और गाजियाबाद के लोनी में चल रही हैं।
उनके अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद कच्चे माल की बढ़ती लागत ने नकली हेलमेट की समस्या को और गंभीर बना दिया है। इसकी वजह यह है कि प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं के शोरूम चलाने वाले कुछ डीलर अपना मार्जिन बचाने के लिए सस्ते व कम गुणवत्ता वाले हेलमेटों की ओर रुख कर रहे हैं।
कपूर ने इस बात पर जोर दिया कि हेलमेट का निर्माण काफी हद तक पेट्रोलियम से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर है। उन्होंने कहा, ‘हेलमेट पूरी तरह से पेट्रोलियम उत्पाद है। अगर आप देखें, तो हेलमेट का 99 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोलियम आधारित होता है।’ उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने के बाद हेलमेट में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम आधारित प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में खासी उछाल आई है।