प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि का सीधा असर हवाई यातायात पर पड़ा है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय, बल्कि घरेलू उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आगामी जून में घरेलू उड़ानों में 7 फीसदी की कमी देखने को मिलेगी। पिछले साल जून में देसी विमानन कंपनियों की ओर से 22,220 घरेलू उड़ानें संचालित की गई थी जो इस वर्ष इसी अवधि में ताजा शेड्यूल के मुताबिक घटकर 20,670 रह गई है।
हवाई अड्डों के मामले में घरेलू साप्ताहिक सेवाओं में सबसे बड़ी गिरावट (फीसदी नहीं, वास्तविक संख्या के मामले में) जीएमआर ग्रुप द्वारा संचालित हैदराबाद हवाई अड्डे पर दर्ज की गई है, जहां निर्धारित साप्ताहिक उड़ानों में सालाना आधार पर 371 की कमी आने की आशंका है। विमानन विश्लेषण फर्म सिरियम के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद हवाई अड्डे पर अगले महीने लगभग 1,420 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें संचालित करेगा। यह आंकड़ा पिछले साल जून की 1,791 उड़ानों से कम है।
जीएमआर द्वारा संचालित गोवा के मोपा हवाई अड्डे पर भी इसी अवधि में 106 साप्ताहिक घरेलू सेवाओं में तेज कमी देखी जा रही है। फेयरफैक्स फाइनैंशियल होल्डिंग्स द्वारा संचालित बेंगलूरु हवाई अड्डे पर जून में सालाना आधार पर साप्ताहिक घरेलू उड़ानों में 293 की कमी देखने को मिलेगी।
भारतीय विमानन कंपनियां सबसे अधिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में वृद्धि से प्रभावित हुई हैं, क्योंकि यह उनकी परिचालन लागत का लगभग 40 फीसदी होता है। विमान पट्टे और रखरखाव की लागत भी डॉलर में आती है, जिसका मतलब है कि रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होने से एयरलाइनों की लागत और बढ़ जाती है।
अदाणी समूह द्वारा संचालित हवाई अड्डे भी इससे प्रभावित दिखाई दे रहे हैं। मुंबई हवाई अड्डे से 253 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें कम हो सकती हैं, जबकि अहमदाबाद हवाई अड्डे पर 111 उड़ानों की कमी आ सकती है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संचालित हवाई अड्डों पर भी इस कटौती का असर दिखेगा। इस वर्ष जून में चेन्नई हवाई अड्डे से 279 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें कम उड़ेंगी।
इसी तरह कोलकाता (191), भुवनेश्वर (96), कोच्चि (84) और वाराणसी (60) तक उड़ानों पर प्रभाव होगा। टाटा समूह के स्वामित्व वाली फुल-सर्विस कैरियर जून में 2,655 साप्ताहिक घरेलू उड़ानों का संचालन करेगी। पिछले साल जून में इस दिग्गज विमानन कंपनी ने 3,696 उड़ानें संचालित की थीं। यह 28 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्शाता है।
स्पाइसजेट से घरेलू साप्ताहिक सेवाओं में लगभग 13 प्रतिशत की कमी की संभावना है, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों में लगभग 10 प्रतिशत की कटौती होगी। इंडिगो भी घरेलू संचालन को मामूली रूप से कम करने के लिए तैयार है, जिसमें साप्ताहिक सेवाएं 13,165 से घटकर 12,852 हो जाएंगी।
अकासा एयर एकमात्र प्रमुख वाहक है जो चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद घरेलू संचालन का विस्तार कर रहा है। यह एयरलाइन इस बार जून में पिछले साल के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक 1,099 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार है। उपर्युक्त हवाई अड्डा ऑपरेटरों और एयरलाइनों में से किसी ने भी बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए प्रश्नों का जवाब नहीं दिया।