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सरकार को मिल सकती है राहत, यूरिया की कीमतें आधी होने से बदलेगा समीकरण

अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में तेज गिरावट के बाद सरकार उर्वरक सब्सिडी के अनुमानों की दोबारा समीक्षा कर सकती है

Published by
संजीब मुखर्जी   
एजेंसियां   
Last Updated- June 12, 2026 | 8:21 AM IST

भारत सरकार को उर्वरक सब्सिडी के अपने अनुमान पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह गिरावट सरकारी कंपनी, नैशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (एनएफएल) द्वारा जारी हाल की यूरिया खरीद निविदा में देखने को मिली।

एनएफएल ने 17 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए देश की सबसे बड़ी निविदा जारी की थी। इसमें पूर्वी और पश्चिमी तटों पर डिलिवरी के लिए यूरिया की कीमत 445-449 डॉलर प्रति टन तक रही, जो अप्रैल में मिल रही कीमतों से लगभग 51 फीसदी से ज्यादा ही कम है। इसका एक बड़ा कारण चीन द्वारा बड़े पैमाने पर यूरिया निर्यात शुरू करना माना जा रहा है।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने कहा कि हाल में निविदा के नतीजों को देखते हुए सरकार उर्वरक सब्सिडी के आंकड़ों की समीक्षा करेगी। हालांकि अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि आपूर्तिकर्ता कितनी मात्रा की पुष्टि करते हैं, कुल आयात कितना होता है और क्या आगे की निविदा में भी कीमतें इतनी कम बनी रहती हैं या नहीं।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जबकि बजट में इसके लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान था। जून तक ही इस बजट का लगभग 24 फीसदी खर्च हो चुका है। व्यापार जगत के कुछ लोगों का मानना है कि इतनी कम कीमतों के कारण भारत 17 लाख टन से भी अधिक यूरिया खरीद सकता है। इस निविदा में कुल 62.4 लाख टन की बोली लगाई गई। हालांकि एक व्यापारी ने सवाल उठाया कि क्या चीन के विक्रेता वास्तव में इतनी कम कीमत पर आपूर्ति करने को तैयार होंगे या बाद में कीमत बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

First Published : June 12, 2026 | 8:21 AM IST