उद्योग

युद्ध की मार: भारतीय विमानन कंपनियों का ₹2500 करोड़ का नुकसान, इंडिगो-एयर इंडिया की कई उड़ानें ठप

पश्चिम एशिया भारतीय विमानन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है मगर वहां चल रहे संघर्ष की वजह से विमानन कंपनियों को उड़ान की संख्या में भारी कटौती करनी पड़ी है

Published by
सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- April 05, 2026 | 10:32 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण घरेलू विमानन कंपनियों को  आय में करीब 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उद्योग द्वारा हितधारकों के साथ साझा किए गए नवीनतम अनुमान के अनुसार यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है और ईरान तथा विशेष रूप से पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद रहता है तो स्थिति और खराब हो सकती है। इससे भारत-यूरोप के लाभदायक मार्ग की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

पश्चिम एशिया भारतीय विमानन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है मगर वहां चल रहे संघर्ष की वजह से विमानन कंपनियों को दैनिक उड़ान की संख्या में भारी कटौती करनी पड़ी है। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्षमता का काफी कम उपयोग हो रहा है, विमान बेकार खड़े हैं और आय का नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है। वैश्विक विमानन विश्लेषकों के अनुसार इंडिगो को गर्मियों के शेड्यूल में प्रतिदिन 310 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने की मंजूरी है मगर वह अपनी अनुमत सीमा का लगभग 60 फीसदी ही उड़ान भर रही है।

इसने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के लिए 115 उड़ानें और राष्ट्रमंडल गंतव्यों के लिए 10 उड़ानें रद्द कर दी हैं। भारत से इन गंतव्यों पर उड़ान सेवाएं निलंबित हैं। भारत-जीसीसी मार्ग पर इंडिगो की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है।

एयर इंडिया समूह पर भी इसका असर पड़ा है। अनुमान के अनुसार एयर इंडिया छह खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के लिए प्रतिदिन 30 से 40 उड़ानें ही संचालित कर रही है जबकि इस क्षेत्र में उसकी 100 से अधिक उड़ानें निधारित हैं।

अतिरिक्त क्षमता का उपयोग घरेलू मार्गों पर करना आसान नहीं है। एक विमान कंपनी के एक वरिष्ठ कार्या​धिकारी ने कहा, ‘हमें पहले से पता नहीं चलता कि कितनी उड़ानों की अनुमति दी जा रही है। यह अक्सर दुबई या अबू धाबी जैसे स्थानों में अंतिम मिनट में तय होता है। खाड़ी देशों के विमानों को स्लॉट आवंटन में प्राथमिकता मिलती है। रास अल खैमा जैसे कुछ मार्गों पर यातायात काफी हद तक एकतरफा होता है, जिसमें यात्री भारत वापस लौटते हैं और आम तौर पर विमानों को खाली उड़ान भरनी पड़ती है, जो व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य है।’

विमानन कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि क्षमता का पूरा उपयोग करने के प्रयास जारी हैं लेकिन यह प्रक्रिया धीमी है। नए मार्गों के लिए नियामक की मंजूरी, अग्रिम टिकट बिक्री और निरंतर मार्केटिंग की आवश्यकता होती है, जिसमें एक महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

उक्त कार्या​धिकारी ने कहा, ‘भारतीय विमानन कंपनियां देश को ‘ट्रां​जिट हब’ के तौर पर विकसित कर रही हैं। खाड़ी देशों से यात्रियों को दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के बाजारों तक पहुंचा रही हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह उभरता हुआ कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।’

एक विमानन कंपनी के मुख्य कार्या​धिकारी ने कहा, ‘पाकिस्तान और कुछ पश्चिम एशियाई हवाई क्षेत्र की अनुपलब्धता के कारण भारतीय विमानन कंपनियों को 40 से 50 फीसदी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत ज्यादा होती है।’

पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने से इंडिगो जैसी भारतीय विमानन कंपनियों को राष्ट्रमंडल देशों के लिए सेवाएं निलंबित करनी पड़ी हैं जबकि अन्य मार्गों पर लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। 

First Published : April 5, 2026 | 10:32 PM IST