उद्योग

भारत के करोड़ों घरों में लगी इन्वर्टर बैटरियां बन सकती हैं बिजली संकट का बड़ा समाधान

सालों से बिजली कटौती के दौरान इस्तेमाल होने वाली इन्वर्टर बैटरियां अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती हैं

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एजेंसियां   
Last Updated- June 10, 2026 | 9:36 AM IST

भारत में इन्वर्टर बैटरियां कोई नई चीज नहीं हैं। बिजली जाने पर पंखा, बल्ब और टीवी चलाने के लिए लोग सालों से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि यही बैटरियां देश की बिजली व्यवस्था को संभालने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। एक समय था जब बिजली कटने पर लोग डीजल जनरेटर चलाते थे। लेकिन अब ज्यादातर घरों में इन्वर्टर बैटरियां हैं। ये बिजली रहने पर चार्ज होती हैं और कटौती होने पर कुछ घंटों तक जरूरी उपकरण चलाती हैं। श्नाइडर इलेक्ट्रिक की अधिकारी प्रीति बजाज का कहना है कि भारत कई विकसित देशों से पहले ही घर-घर ऊर्जा स्टोरेज का मॉडल अपना चुका है।

करोड़ों घरों में मौजूद है यह ‘छिपी हुई ताकत’

भारत में ल्यूमिनस जैसी कंपनियों के करोड़ों ग्राहक हैं। अनुमान है कि देशभर में लगी इन्वर्टर बैटरियां मिलकर इतनी बिजली स्टोर कर सकती हैं, जितनी दुनिया के कई बड़े बैटरी नेटवर्क करते हैं। मजेदार बात यह है कि इन बैटरियों की क्षमता पर ज्यादा चर्चा ही नहीं होती, जबकि ये हर शहर और कस्बे में मौजूद हैं। अभी ज्यादातर घरों में लेड-एसिड बैटरियां लगी हैं, जिनमें समय-समय पर पानी डालना पड़ता है। लेकिन अब लिथियम-आयन बैटरियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। ये बैटरियां छोटी होती हैं, कम जगह घेरती हैं, ज्यादा समय तक चलती हैं और रखरखाव भी कम मांगती हैं। पहले इनकी कीमत ज्यादा थी, लेकिन अब ये धीरे-धीरे सस्ती हो रही हैं।

तकनीक बेहतर होने के साथ इन्वर्टर सिस्टम भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं। करीब 30,000 रुपये में ऐसा सिस्टम खरीदा जा सकता है जो इंडक्शन चूल्हा भी चला सके। यानी बिजली जाने पर सिर्फ रोशनी ही नहीं, खाना बनाना भी जारी रह सकता है। भारत में एसी की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गर्मियों में शाम होते ही लाखों लोग एसी चालू कर देते हैं। लेकिन यही वह समय होता है जब सोलर पैनल बिजली बनाना लगभग बंद कर देते हैं। यानी दिन में बिजली ज्यादा होती है और शाम को उसकी जरूरत सबसे ज्यादा पड़ती है।

अगर दिन में सोलर पैनलों से बनी बिजली बैटरियों में जमा कर ली जाए और शाम को इस्तेमाल की जाए, तो बिजली ग्रिड पर दबाव काफी कम हो सकता है। सरकार 2027 तक 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर इन घरों में बैटरियां भी लगती हैं, तो देश के पास बड़ी मात्रा में बिजली स्टोर करने की क्षमता तैयार हो जाएगी। आने वाले समय में ज्यादातर घरों में स्मार्ट मीटर लगेंगे। इससे लोगों को पता चलेगा कि किस समय बिजली सस्ती है और किस समय महंगी। ऐसे में लोग दिन में सस्ती बिजली स्टोर करके शाम को इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे बिजली का बिल भी कम होगा और बिजली व्यवस्था पर दबाव भी घटेगा।

भारत दुनिया से आगे निकल सकता है

जिस इन्वर्टर को लोग अब तक सिर्फ बिजली कटने की परेशानी से बचने का साधन मानते थे, वही आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा आधार बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में मौजूद बैटरियां, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां मिलकर भारत को बिजली स्टोरेज के मामले में दुनिया के कई विकसित देशों से आगे ले जा सकती हैं। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

First Published : June 10, 2026 | 9:23 AM IST