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नोएडा एयरपोर्ट को सफल बनाने में कनेक्टिविटी बनी बड़ी बाधा, इंडिगो और एयर इंडिया ने जताई चिंता

इंडिगो और एयर इंडिया ने नोएडा एयरपोर्ट पर ऊंचे शुल्क और कमजोर कनेक्टिविटी पर चिंता जताई है, जिससे हवाई किराया बढ़ने और यात्री कम होने का डर है

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दीपक पटेल   
Last Updated- April 27, 2026 | 10:05 PM IST

देश की दो प्रमुख विमानन कंपनियों – इंडिगो और एयर इंडिया ने भारतीय हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण (एईआरए) को सूचित किया है कि हाल में शुरू किए गए नोएडा हवाई अड्डे पर अधिक लागत और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बड़ी दिक्कतें बन सकती हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी मिली है।

इंडिगो ने कहा है कि दिल्ली हवाई अड्डे की तुलना में अधिक प्रस्तावित विमानन शुल्क के कारण ज्यादा लागत हवाई किराए को बढ़ा देगी और नोएडा हवाई अड्डे को ‘वाणिज्यिक रूप से अनाकर्षक’ कर देगी।

एयर इंडिया ने कहा कि जब तक पर्याप्त और सुविधाजनक जमीनी कनेक्टिविटी नहीं होगी, तब तक कॉरपोरेट यात्री नोएडा हवाई अड्डे से बचते रहेंगे। टाटा समूह द्वारा संचालित इस एयरलाइन ने अदाणी समूह द्वारा संचालित नवी मुंबई हवाई अड्डे का भी उदाहरण दिया, जहां मुंबई हवाई अड्डे की तुलना में ‘अधिक विमानन शुल्क’ वृद्धि दर में बाधक हैं।

फिलहाल एईआरए साल 2026-2031 तक की अवधि के लिए नोएडा हवाई अड्डे के वास्ते विमानन शुल्क (विमान लैंडिंग शुल्क, पार्किंग शुल्क, उपयोगकर्ता विकास शुल्क आदि) तय करने की प्रक्रिया में है।

ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनैशनल एजी की सहायक कंपनी यमुना इंटरनैशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) नोएडा हवाई अड्डे का संचालन करती है। उसने इस साल की शुरुआत में एईआरए को अपनी प्रस्तावित शुल्क सूची सौंपी थी। इंडिगो और एयर इंडिया ने 7 अप्रैल के अपने-अपने पत्रों के जरिये इस शुल्क सूची का विरोध किया।

अपने पत्र में इंडिगो ने कहा, ‘नोएडा हवाई अड्डा और दिल्ली हवाई अड्डा दोनों ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सेवा करेंगे, जिसमें खासा ओवरलैपिंग (दोनों विकल्पों का लाभ उठाना) होगा। लेकिन नोट करने वाली बात यह है कि नोएडा हवाई अड्डे पर विमानन शुल्क (प्रस्तावित) दिल्ली हवाई अड्डे की तुलना में काफी अधिक हैं।’

First Published : April 27, 2026 | 9:42 PM IST