प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) का शेयर ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से 18 फीसदी गिरकर 3,943 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। जहां एक ओर ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (एफडीटीएल) के नियमों ने दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों पर असर डाला था, वहीं खाड़ी में चल रहे तनाव के कारण इस मार्केट लीडर को वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 27 में मांग, लागत और राजस्व से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इन नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए ब्रोकरेज फर्मों ने चौथी तिमाही के साथ-साथ वित्त वर्ष 27 के लिए अपने मार्जिन और शुद्ध मुनाफे के अनुमानों में कटौती की है। हालांकि ये कारक शेयर पर दबाव बनाए रखेंगे, लेकिन 10 मार्च को इस्तीफा देने वाले पीटर एल्बर्स की जगह विलियम वॉल्श को मुख्य कार्याधिकारी नियुक्त किए जाने से शेयर की कीमत में कुछ स्थिरता आ सकती है।
ईरान युद्ध का तात्कालिक असर राजस्व पर पड़ेगा। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च के मीत जैन की अगुआई वाले विश्लेषकों ने कहा कि फरवरी 2026 के आखिर से अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने और साथ ही भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस के लगातार बंद रहने की वजह से इंडिगो का पूरा पश्चिम एशिया और उसके यूरोपीय नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा फिलहाल लगभग ठप हो गया है।
इसका नतीजा यह हुआ कि पश्चिम एशिया का एयरस्पेस धीरे-धीरे बंद होता गया और उस कॉरिडोर में पाबंदियां लग गईं, जिससे यात्रियों की संख्या के हिसाब से दुनिया के कुल इंटरनैशनल हवाई ट्रैफिक का एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है। खाड़ी मार्ग का निलंबन (जो सालाना आधार पर कुल राजस्व का करीब 18-20 फीसदी यानी 14,500 करोड़ रुपये से 16,000 करोड़ रुपये होता है) से न सिर्फ उस महीने की यात्रा पर असर पड़ा बल्कि अग्रिम बिक्री पर भी चोट पड़ी, जिससे वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में राजस्व में कमी आएगी।
दूसरा असर लागत पर पड़ा है क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल की शुरुआत में इनकी कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से कम थी, जो अब करीब 60 फीसदी बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (जो क्रूड ऑयल की कीमतों से जुड़ा होता है) जनवरी और फरवरी में कीमतों में कटौती के बाद मार्च में महंगा हो गया।
मोतीलाल ओसवाल रिसर्च का अनुमान है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में हर डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से मुनाफा 360 करोड़ रुपये कम हो जाता है। ब्रोकरेज ने 1,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत का अनुमान लगाया है क्योंकि कुल लागत में फ्यूल का हिस्सा लगभग एक-तिहाई होता है।
लागत बढ़ने की मुख्य वजह कमजोर रुपया और उपलब्ध प्रति सीट किलोमीटर (सीएएसके) पर ईंधन के अलावा दूसरी लागतों का बढ़ना है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि वित्त वर्ष 25 के सीएएसके (ईंधन को छोड़कर) 3.09 रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 26 के नौ महीने का सीएएसके 3.17 रुपये रहा है। ब्रोकरेज फर्म के अंशुमन देव की अगुआई वाले विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के लिए सीएएसके का अनुमान 3.54 रुपये लगाया है जबकि वित्त वर्ष 27 और वित्त वर्ष 28 के लिए यह अनुमान क्रमशः 3.40 रुपये और 3.37 रुपये है। ब्रोकरेज का कहना है कि सामान्य महंगाई और कमजोर रुपये के अलावा इंडिगो का पूंजीगत खर्च और फाइनैंस लीज भी ज्यादा है, जिससे नकदी और मुनाफे के मार्जिन में बढ़ोतरी सीमित रहेगी।
ईंधन की ज्यादा लागत, रुपये की गिरावट और अंतरराष्ट्रीय परिचालन में कमी के कारण परिचालन लिवरेज पर पड़े बुरे असर को देखते हुए मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने वित्त वर्ष 26 और वित्त वर्ष 27 के लिए किराए से पहले के परिचालन मुनाफे के अपने अनुमानों में 7 फीसदी की कटौती की है। इसने वित्त वर्ष 26 के लिए अपने शुद्ध मुनाफे के अनुमान में 31 फीसदी की कटौती की है जबकि वित्त वर्ष 27 और वित्त वर्ष 28 के लिए यह कटौती क्रमशः 15 फीसदी और 10 फीसदी है। हालांकि मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने शेयर के लिए लक्षित कीमत घटाकर 5,500 रुपये प्रति शेयर कर दी है, फिर भी उसने खरीद की रेटिंग बरकरार रखी है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने भी खरीद की रेटिंग दी है। हालांकि उसने लक्षित कीमत 5,680 रुपये से घटाकर 5,210 रुपये प्रति शेयर कर दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और क्रैक मार्जिन के साथ ही रुपये में आई भारी गिरावट के कारण लागत के अनुमान बढ़ गए हैं। उम्मीद है कि कीमतों में बढ़ोतरी से इसकी कुछ हद तक भरपाई हो जाएगी। इसी के चलते वित्त वर्ष 27 के उसके अनुमानों में अब भारी कटौती देखने को मिली है, जबकि वित्त वर्ष 28 के अनुमानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।