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China Silent Sanctions: भारत की मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का नया वार! टैलेंट पर ‘साइलेंट सैंक्शन’ से मच गया हड़कंप

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China Silent Sanctions: Foxconn से सैकड़ों चीनी इंजीनियरों की वापसी ने भारत में iPhone प्रोडक्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Last Updated- July 03, 2025 | 2:09 PM IST
Manufacturing in India

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिशों को झटका लग सकता है, क्योंकि चीन अब अपने तकनीकी एक्सपर्ट्स और आधुनिक टेक्नोलॉजी को बाहर भेजने पर चुपचाप रोक लगा रहा है। इस नई रणनीति का असर भारत में एप्पल के सबसे बड़े कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन पर साफ दिख रहा है, जहां से 300 से ज्यादा चीनी इंजीनियर और टेक्नीशियन लौट चुके हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने इस साल की शुरुआत में ही स्थानीय सरकारों और एजेंसियों को यह ‘संकेत’ दे दिया था कि वे भारत और वियतनाम जैसे देशों में टैलेंट और टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर न होने दें। ये प्रतिबंध भले ही आधिकारिक नहीं हैं, लेकिन इन्हें “साइलेंट सैंक्शन” माना जा रहा है।

फॉक्सकॉन से लौटे 300 चीनी इंजीनियर

तमिलनाडु और कर्नाटक में मौजूद फॉक्सकॉन की फैक्ट्रियों से पिछले दो महीनों में 300 से ज्यादा चीनी इंजीनियर वापस लौट चुके हैं। इनमें से ज़्यादातर एक्सपर्ट भारत में iPhone प्रोडक्शन लाइन को तेज़ी से खड़ा करने और स्थानीय वर्कर्स को ट्रेनिंग देने के लिए लाए गए थे।

अब उनकी जगह ज़्यादातर ताइवानी इंजीनियर काम कर रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब एप्पल अपनी नई iPhone 17 सीरीज़ के प्रोडक्शन की तैयारी कर रहा है और कर्नाटक के देवनहल्ली में अपनी 300 एकड़ की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तैयार कर रहा है।

इंजीनियरों की वापसी से प्रोडक्शन की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन काम की रफ्तार और स्किल ट्रांसफर की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

चीन+1 नीति से भारत को फायदा, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी

कोविड महामारी के बाद एप्पल ने ‘चीन+1’ रणनीति अपनाई थी, यानी चीन के अलावा एक और देश में प्रोडक्शन सेटअप। भारत ने इस नीति का पूरा फायदा उठाया। ₹17,000 करोड़ की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत HP, Asus और Dixon जैसी ग्लोबल कंपनियों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू की। इसके अलावा, इटली की टॉय कंपनियां भी भारत में शिफ्ट हुई हैं। यहां तक कि अमेरिका द्वारा अप्रैल में चीनी प्रोडक्ट्स पर लगाए गए टैरिफ के बाद, कई चीनी कंपनियां भारतीय एक्सपोर्टर्स से कॉन्टैक्ट कर रही हैं ताकि भारत से सामान भेजकर अमेरिका के ऑर्डर पूरे कर सकें।

भारत-चीन संबंधों में तनाव अब भी कायम

भले ही भारत और चीन के बीच राजनयिक बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन कई स्तरों पर तनाव बना हुआ है। भारत में अब भी TikTok जैसे कई चीनी ऐप्स बैन हैं, वहीं चीन ने यूरिया और अन्य ज़रूरी वस्तुओं के निर्यात पर सख्ती बरती है। वहीं, भारत और वियतनाम के बीच निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा है। भारत अब तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सेक्टर्स में चीन पर अपनी निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है।

iPhone प्रोडक्शन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी

Apple अब 2026 तक अमेरिका के लिए बनने वाले ज्यादातर iPhones भारत में ही बनाना चाहता है। Tata Electronics, Wistron, Pegatron और Foxconn जैसे भारतीय पार्टनर्स अब iPhones में 20% से ज़्यादा घरेलू वैल्यू एडिशन कर रहे हैं। 2024-25 के वित्तीय वर्ष में भारत से ₹1.5 लाख करोड़ के iPhones का एक्सपोर्ट हुआ है। हालांकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Apple CEO टिम कुक से कहा है कि वे प्रोडक्शन अमेरिका ले जाएं। लेकिन अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग की लागत और नियमों की जटिलता के कारण यह अभी व्यावहारिक नहीं है।

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First Published - July 3, 2025 | 2:09 PM IST

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