केंद्र सरकार के सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी करने के बाद विश्लेषकों ने ज्वैलरी शेयरों के अल्पावधि से लेकर मध्यम अवधि परिदृश्य को लेकर चिंता जताई है। सरकार ने यह कदम आयात घटाने और रुपये को सहारा देने के लिए उठाया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से देश में सोने की कीमतें और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे ज्वैलरी की मांग पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर तब जबकि कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊंची कीमतों के कारण लोग अपनी मर्ज़ी से की जाने वाली खरीद को टाल सकते हैं, जिसका असर टाइटन कंपनी, कल्याण ज्वैलर्स, सेंको गोल्ड और पीसी ज्वेलर जैसे संगठित रिटेलरों पर पड़ सकता है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और सीईओ जी. चोकालिंगम ने कहा, सोने की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल और भारतीय रुपये के अवमूल्यन के बाद गहने खरीदने वालों के लिए आयात शुल्क में इजाफा तीसरा बड़ा झटका है। उन्होंने कहा, हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की वैश्विक कीमतों में कुछ गिरावट आई है, लेकिन रुपये की कमजोरी के कारण घरेलू सोने की कीमतें अभी भी रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बनी हुई हैं।
एनएसई पर कारोबारी सत्र के दौरान कल्याण ज्वैलर्स, सेंको गोल्ड, स्काई गोल्ड ऐंड डायमंड, पी एन गाडगिल, टाइटन कंपनी और थंगामायल ज्वैलरी के शेयर 11.3 फीसदी तक गिर गए। लेकिन अंत में ये 7.6 फीसदी की गिरावट से लेकर 4 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। इनकी तुलना में निफ्टी 50 इंडेक्स 0.14 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।
बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के वायदा भाव में करीब 7 फीसदी की तेजी आई और कारोबारी सत्र के दौरान यह 1,63,988 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में कीमतों में करीब 7 फीसदी की तेजी आई है, लेकिन वे इस साल जनवरी में बने रिकॉर्ड उच्च स्तर 1,93,00 रुपये से काफी नीचे बनी हुई हैं।
नए नियम 13 मई, 2026 से लागू हो गए हैं। इनके अनुसार सोने और चांदी के आयात पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 4.35 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है जबकि कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (एआईडीसी) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है, जिससे कुल आयात शुल्क प्रभावी रूप से 5 फीसदी से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है। खास बात यह है कि वित्त वर्ष 26 में भारत के कुल आयात बिल में सोने के आयात का हिस्सा लगभग 9-10 फीसदी रहा। पिछले वित्त वर्ष में आयात में सालाना आधार पर 24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
विश्लेषकों का कहना है कि शुल्क में बढ़ोतरी से जौहरियों की बिक्री कम हो सकती है क्योंकि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ता कम से मध्यम अवधि में खरीदारी टाल सकते हैं। इससे आभूषण कारोबारियों के मुनाफे और राजस्व पर असर पड़ेगा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत में सोने के आभूषणों की खपत पिछले वर्ष की तुलना में 19 फीसदी घटकर 66.1 टन रह गई।
मिरे ऐसेट शेयरखान की शोध विश्लेषक नेत्रा देशपांडे ने कहा, टाइटन, सेंको गोल्ड और कल्याण ज्वैलर्स जैसी कंपनियों को लागत का कुछ दबाव झेलना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें 9 फीसदी की बढ़ोतरी का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना होगा। सोने की कीमत को रुपये में बदलने के बाद आधार कीमत को पैरिटी प्राइस के हिसाब से समायोजित करना पड़ता है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी के कारण गहनों की मांग कम हो सकती है, सिवाय शादी और त्योहारी खरीदारी के सीज़न के।
उद्योग संस्था इंडिया बुलियन ऐंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) ने कहा कि ज्वैलरी का कारोबार 5-7 फीसदी तक गिर सकता है जबकि इस बढ़ोतरी के बाद सोने की कुल मांग में लगभग 10 फीसदी की गिरावट आ सकती है।