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बायोकॉन में उत्तराधिकार का आगाज! किरण मजूमदार-शॉ ने भतीजी क्लेयर को चुना अपना वारिस

बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ ने अपनी भतीजी क्लेयर मजूमदार को उत्तराधिकारी घोषित किया है। क्लेयर अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नेतृत्व की कमान संभालेंगी

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सोहिनी दास   
Last Updated- May 06, 2026 | 1:39 AM IST

बायोटेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी बायोकॉन अब उत्तराधिकार के दौर में प्रवेश कर रही है। कंपनी की संस्थापक और चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने अपनी भतीजी क्लेयर मजूमदार को अपना भावी उत्तराधिकारी घोषित किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कंपनी अपने विकास के अगले चरण की तैयारी कर रही है और इससे नेतृत्व में निरंतरता का संकेत मिलता है।

हाल में एक साक्षात्कार में मजूमदार-शॉ ने कहा कि उन्होंने चरणबद्ध तरीके से बदलाव की योजना बनाई है, जिसके तहत क्लेयर धीरे-धीरे नेतृत्व की भूमिका में आएंगी और आखिरकार चेयरपर्सन का पद संभाल लेंगी। बदलाव की प्रक्रिया अगले पांच साल में पूरी होने की उम्मीद है। मजूमदार-शॉ ने संकेत दिया है कि वह तुरंत पद नहीं छोड़ रही हैं, बल्कि वह एक व्यवस्थित तरीके से पदभार सौंपना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि बायोकॉन को ‘सही हाथों में’ सौंपा जाए। मजूमदार-शॉ ने कहा, ‘मैंने अपनी भतीजी क्लेयर को अपनी उत्तराधिकारी के तौर पर देखा है, क्योंकि मुझे लगता है कि उसने यह साबित कर दिया है कि वह एक कंपनी चला सकती है।’ सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में, मजूमदार-शॉ ने कहा, ‘क्लेयर सही समय पर मेरी जगह लेगी, इसलिए मैं अभी रिटायर होने की योजना नहीं बना रही हूं।’

बाजार की प्रतिक्रिया थोड़ी सकारात्मक रही। इस घोषणा के बाद मंगलवार को बीएसई पर बायोकॉन का शेयर लगभग 2.36 प्रतिशत चढ़ गया, जो निवेशकों के उस भरोसे को दर्शाता है कि उत्तराधिकार की रूपरेखा स्पष्ट रूप से पेश की गई है और प्रवर्तक का नियंत्रण बना रहेगा।

37 वर्षीय क्लेयर मजूमदार को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उद्यमिता का अनुभव है। वह बिकारा थेरेप्यूटिक्स की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी हैं। यह एक क्लिनिकल-स्टेज ऑन्कोलॉजी कंपनी है जो ट्यूमर के लिए बाइफंक्शनल एंटीबॉडीज के विकास से जुड़ी हुई है।

बिकारा में उन्होंने स्ट्रैटजी, कोष जुटाने और भागीदारियों की जिम्मेदारी संभाली और कंपनी को शुरुआती शोध के दौर से नैस्डैक में लिस्टिंग तक पहुंचाया, जो कि पहली बार कंपनी शुरू करने वाले किसी संस्थापक के लिए एक असाधारण सफर है। बिकारा वर्ष 2024 में 80 करोड़ डॉलर से ज्यादा के मूल्यांकन के साथ नैस्डैक में सूचीबद्ध हुई थी। अब इसका बाजार पूंजीकरण 1.6 अरब डॉलर से भी अधिक है, जबकि इसकी मुख्य कैंसर थेरेपी अभी भी क्लिनिकल ट्रायल में है।

उन्होंने एमआईटी से बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस, स्टेनफर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए और स्टेनफर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन से कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

First Published : May 6, 2026 | 1:39 AM IST