प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में वाहन बनाने वाली फैक्टरियों की कैंटीनों में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कमी होने लगी है। अगर यही हालात बने रहे तो उत्पादन गतिविधियों में रुकावट आ सकती है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को एक पत्र में इस बारे में बता दिया है।
13 मार्च को लिखे पत्र में सायम ने कहा, ‘सायम की सदस्य कंपनियों की निर्माण इकाइयों में सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं और ये लोग कई शिफ्टों में होते हैं। ये कर्मचारी अपनी लंबी शिफ्ट के दौरान संयंत्र की कैंटीनों पर जरूरी सेवा के तौर पर निर्भर रहते हैं।’
सायम ने अपने पत्र में कहा है, ‘सदस्यों ने बताया है कि ऐसी कैंटीनों के लिए एलपीजी की उपलब्धता में आ रही रुकावटों का असर कुछ जगहों पर उनके रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ने लगा है। अगर यही स्थिति रही तो इससे शिफ्ट के कामकाज पर असर पड़ सकता है और विनिर्माण गतिविधियों तथा आपूर्ति श्रृंखला में बाधा पैदा हो सकती है।’
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए, जिससे पश्चिम एशिया में एक नया संघर्ष छिड़ गया और दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह अटक गई।
इस रुकावट की वजह से कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी के मुख्य आपूर्तिकर्ता देशों से भारत आने वाले एलपीजी कार्गो की आवाजाही धीमी पड़ गई है। इसलिए, एहतियात के तौर पर भारत सरकार ने रिफाइनरियों से कहा है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का इस्तेमाल करके एलपीजी उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। इन गैसों का इस्तेमाल पहले पेट्रोकेमिकल्स (जैसे प्लास्टिक) बनाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा, रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे औद्योगिक इस्तेमाल करने वालों के बजाय घरों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को कुकिंग गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दें।
सायम ने 13 मार्च के अपने पत्र में सरकार की उस पहल की ‘सराहना’ की, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों जैसे जरूरी संस्थानों को एलपीजी की आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई है।
पत्र में कहा गया, ‘इस संदर्भ में, हम निवेदन करते हैं कि विनिर्माण संयंत्र के अंदर की कैंटीनों को भी इसी तरह की प्राथमिकता देने पर विचार किया जाए, क्योंकि औद्योगिक कामकाज को बिना किसी रुकावट के चलाने और कर्मचारियों का कल्याण सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका बहुत अहम है।’
नीति आयोग की 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग देश के जीडीपी में लगभग 7.1 प्रतिशत और विनिर्माण जीडीपी में लगभग 49 प्रतिशत का योगदान देता है।