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El Nino: केंद्र सरकार ने किसानों को आश्वस्त किया है कि संभावित एल नीनो के असर से खरीफ सीजन की बुवाई पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। सरकार का कहना है कि इस बार स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर है और कृषि क्षेत्र किसी भी मौसमीय चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को खरीफ सीजन की तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के उस पूर्वानुमान पर चर्चा हुई जिसमें 2026 में एल नीनो के कारण मानसून पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
मंत्री ने कहा कि किसानों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में जल प्रबंधन बेहतर हुआ है, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है और जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक और जलवायु अनुकूल खेती के तरीकों ने कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाया है।
बैठक में मौसम पूर्वानुमान, राज्यों में पानी की उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज भंडार और तैयारियों की समीक्षा की गई। साथ ही संभावित मौसमीय जोखिम से निपटने के लिए आपात योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि पिछले दो दशकों में भारतीय कृषि ढांचे में काफी सुधार हुआ है। साल 2000 से 2016 के बीच एल नीनो का असर कृषि उत्पादन पर ज्यादा पड़ता था, क्योंकि उस समय बारिश पर निर्भरता अधिक थी और प्रबंधन व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं थी। लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है और असर सीमित रहने की उम्मीद है।
हाल के वर्षों में कृषि उत्पादन में स्थिरता बढ़ी है। इसकी वजह सिंचाई नेटवर्क का विस्तार, पानी बचाने की बेहतर तकनीकें, खेत प्रबंधन में सुधार और अधिक उपज देने वाली तथा मौसम के अनुकूल बीज किस्मों का बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है।
सरकार ने मौजूदा हालात और मौसम के पूर्वानुमानों को देखते हुए हाल ही में एक समीक्षा बैठक की। इस दौरान भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुमान पर भी चर्चा हुई, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रह सकता है। विभाग के अनुसार इस बार बारिश लंबी अवधि के औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। साथ ही मानसून के दौरान एल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि इसका अधिक स्पष्ट आकलन मई के अंत तक सामने आएगा।
इन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि स्थिति पर भरोसा भी जताया जा रहा है।
बैठक में एक सकारात्मक बात यह सामने आई कि देश के कई जलाशयों में पानी का भंडारण अभी संतोषजनक स्थिति में है, जो आने वाले समय में कृषि गतिविधियों के लिए राहत की बात मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय देश में जल भंडारण का स्तर सामान्य से करीब 127 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे खरीफ सीजन के लिए काफी राहतभरा माना जा रहा है, क्योंकि इससे सिंचाई की जरूरतें पूरी होने में मदद मिलेगी और बारिश की कमी का असर भी काफी हद तक कम हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इसी स्थिति को देखते हुए एल नीनो जैसी संभावित मौसमीय स्थिति का कृषि पर असर पिछले वर्षों की तुलना में सीमित रहने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ फसलें जैसे धान मौसम की बदलती परिस्थितियों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहनशील पाई गई हैं। हालांकि अन्य फसलों के लिए अलग-अलग रणनीतियां तैयार की जा रही हैं ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर क्षेत्र और हर फसल के हिसाब से अलग योजना बनाना जरूरी है, जिससे किसानों को समय पर सलाह, बीज और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे जिले स्तर तक अपनी आपातकालीन तैयारियों को सक्रिय रखें और किसी भी तरह की खराब मौसम स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सरकार की ओर से किसानों को वैकल्पिक फसल विकल्प अपनाने, देर से बुवाई की रणनीति और सूखा सहन करने वाली किस्मों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को व्यवहारिक और तुरंत समाधान मिल सके।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है और आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार भी तैयार रखा गया है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि अनियमित मौसम से प्रभावित इलाकों में उपयुक्त किस्मों को तेजी से उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष “बफर सिस्टम” तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को समय पर बेहतर बीज और तकनीक मिल सके, ताकि फसल पर मौसम की मार का असर कम किया जा सके।
कृषि मंत्री ने बताया कि हालात पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इसके साथ ही नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लिए जा सकें और किसानों को समय पर मदद मिलती रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच लगातार तालमेल बनाया जा रहा है। हर जिले के लिए अपडेटेड कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए गए हैं और संकट की स्थिति से निपटने के लिए संस्थागत व्यवस्था को भी सक्रिय किया गया है। इसका मकसद खेती को स्थिर बनाए रखना और किसानों का भरोसा कायम रखना है।
कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार की कोशिश सिर्फ जोखिम का आकलन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से तैयारी करके ऐसे कदम उठाना है जिससे खरीफ सीजन बिना बाधा के आगे बढ़ सके, भले ही मौसम की चुनौतियां बनी रहें।