उद्योग

खाद सप्लाई को सुरक्षित बनाने के लिए नीति में बदलाव जरूरी, रिपोर्ट में बड़ा सुझाव

इक्रियर की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को उर्वरक क्षेत्र में नीतिगत सुधार कर सब्सिडी व्यवस्था और आयात निर्भरता में बदलाव करना चाहिए।

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संजीब मुखर्जी   
Last Updated- March 14, 2026 | 9:49 AM IST

भारत को पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संकट के दौर में उर्वरक क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित नीतिगत सुधार करना चाहिए। भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (इक्रियर) के शोधपत्र, ‘बढ़ते भूराजनीतिक जोखिमों के बीच भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति को जोखिममुक्त करने’ के अनुसार भारत पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दौर में नीतिगत सुधार करे। इन सुधारों में किसानों को सीधे उर्वरक सब्सिडी का हस्तांतरण और मैक्रो पोषक तत्त्वों के मूल्य से धीरे धीरे विनियमन हटाना आदि शामिल हैं। इससे न केवल संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा बल्कि राजकोषीय दबाव भी कम होगा। साथ ही लगभग 20 प्रतिशत तक होने वाले अनुमानित नुकसान को भी रोका जा सकेगा।

यह शोधपत्र आज जारी किया गया। उपयुक्त सुधार बहुत साहसिक प्रतीत होते हैं तो अल्पकाल में विकल्प यह होगा कि खेत के आकार, फसल पैटर्न और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू)  के जारी अनुशंसित पोषक तत्त्वों  की मात्रा के आधार पर बिक्री पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाए जाए। शोध पत्र में कहा गया है, ‘यह एग्रीस्टैक की सहायता से किया जा सकता है। इस पर सरकार लंबे समय से काम कर रही है।’ रितिका जुनेजा, सच्चिदा नंद, एमिल थॉमस जॉनी और अशोक गुलाटी ने इस शोधपत्र को लिखा है।

इसमें कहा गया है कि यदि पहले दो विकल्प व्यावहारिक नहीं लगते हैं तो तीसरा विकल्प कम से कम यूरिया को पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के अंतर्गत लाना हो सकता है। शोधपत्र में कहा गया कि आयात स्रोतों और उत्पादों का विविधीकरण कुछ सीमित देशों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से भू-राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में। हालांकि पोषक तत्त्वों के उपयोग में दक्षता में सुधार के पूरक उपाय भी जरूरी हैं।

इन पूरक उपायों में उर्वरक खनिजों और उत्पादन संपत्तियों में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना, उर्वरक संसाधनों के घरेलू अन्वेषण में तेजी लाना और नियामक व मूल्य निर्धारण ढांचे को युक्तिसंगत बनाना आदि हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। इसका कारण यह है कि भारत की उर्वरक मूल्य श्रृंखला का 68.6 प्रतिशत से अधिक हिस्सा (भारत में उर्वरक बनाने में उपयोग होने वाले कच्चे माल का 44.5 प्रतिशत और तैयार उत्पादों का 24.1 प्रतिशत) आयात किया जाता है और यह अक्सर भू-राजनीतिक तनावों के संपर्क में आता रहता है।

उर्वरक में आत्मनिर्भरता के लिए उठे कई कदम

केंद्रीय उर्वरक मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज संसद में लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। इसके तहत राष्ट्रीय निवेश नीति 2012 के तहत छह नई यूरिया इकाइयों की स्थापना (चार नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ संयुक्त उद्यम में और दो निजी क्षेत्र में) और अप्रैल, 2010 से लागू पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी व्यवस्था शामिल हैं। इसमें कई बार संशोधन किए गए हैं ताकि इसमें पीएंडके उर्वरकों के नए ग्रेड, सिंगल सुपर फॉस्फेट के लिए माल ढुलाई सब्सिडी और अन्य संयंत्रों को लाभ शामिल किया जा सके।

First Published : March 14, 2026 | 9:49 AM IST