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कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को मिलेगी राहत? भारी घाटे के बाद रेल मंत्रालय कर रहा शुल्क माफी पर विचार

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ठप पड़े समुद्री व्यापार से कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को भारी नुकसान हो रहा है। रेल मंत्रालय अब उन्हें वित्तीय राहत देने पर विचार कर रहा है

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ध्रुवाक्ष साहा   
Last Updated- April 20, 2026 | 10:50 PM IST

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से प्रभावित कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) को रेल मंत्रालय राहत देने पर विचार कर रहा है।  इसके लिए कई अनुरोध आए थे। मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

सीटीओ निजी ऑपरेटर होते हैं, जो रेलवे के साथ लाइसेंसिंग समझौते के तहत अपने स्वयं के रेक्स (ट्रेन) का उपयोग निर्यात-आयात (एक्सिम) और घरेलू कंटेनरों को लादकर ले जाने के लिए करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पर इसके प्रभाव के कारण समुद्री कंटेनर व्यापार में गिरावट आई है। इससे सीटीओ को राजस्व का भारी नुकसान हुआ है।

 क्षमता की कमी के कारण उन्हें और भी अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। इस्तेमाल न किए जाने वाले रेक को रेलवे अपने पास निष्क्रिय रखता है। रेक को निष्क्रिय रखे जाने पर ‘स्टेबिंग चार्ज’ लगता है, जिसका भुगतान ऑपरेटर को करना पड़ता है। कारोबार कम होने के कारण बड़े पैमाने पर रेक को निष्क्रिय रखना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी जरूरत नहीं पड़ रही है।

 एसोसिएशन ऑफ कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर्स (एसीटीओ) के प्रेसीडेंट मनीष पुरी के अनुसार लगभग 50 ऐसे रेक निष्क्रिय रखे जा रहे हैं, जो सामान्य से लगभग 5 से 8 गुना अधिक है। इसके अलावा ट्रेनों को अक्सर बंदरगाहों की ओर या बंदरगाहों  तक आने और जाने दोनों स्थिति में खाली चलाना पड़ रहा है। ऑपरेटरों को बिना किसी कार्गो के ‘हॉलेज’ (परिवहन) शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है।

सरकारी अधिकारी ने बताया कि रेलवे शुरुआत में अनिच्छुक था, लेकिन ऑपरेटरों को होने वाले किसी भी दीर्घकालिक नुकसान का रेलवे के समग्र माल ढुलाई की मात्रा पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए राहत पर विचार कर रहा है। इसके अलावा सरकार का व्यापक दृष्टिकोण उचित होने पर व्यवसायों को राहत देने का है। अधिकारी ने कहा कि पिछले सप्ताह कई बैठकें हुई हैं, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।  सरकारी और निजी ऑपरेटरों द्वारा लगभग 700 ट्रेनें चलाई जाती हैं, जिनमें से आधी निजी कंपनियों द्वारा चलाई जाती हैं।

First Published : April 20, 2026 | 10:11 PM IST