उद्योग

मेट्रो शहरों को मात दे रहे छोटे शहर: ऑफिस लीजिंग में आई दोगुनी उछाल, इंदौर-जयपुर बने नए हब

कम लागत और बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण दिग्गज कंपनियां अब महानगरों को छोड़ मझोले शहरों का रुख कर रही हैं, जिससे वहां ऑफिस लीजिंग दोगुनी हो गई है

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प्राची पिसल   
Last Updated- March 29, 2026 | 10:52 PM IST

भारत में महानगरों के बाद की श्रेणी में आने वाले मझोले शहर ऑफिस संपत्ति के बाजार में तेजी से नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इन शहरों में वित्त वर्ष 2025 में ऑफिस लीजिंग यानी कार्यालयों को पट्टे पर देने की गतिविधियों में सालाना आधार पर लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है।

उद्योग के अधिकारियों और सलाहकारों का कहना है कि कब्जेदार अब टैलेंट पूल का लाभ उठाने और लागत कम करने के लिए तेजी से विकेंद्रीकृत विस्तार रणनीतियां अपना रहे हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार, महानगरों में बढ़ते किराये और कर्मचारियों की बदलती पसंद कंपनियों को शीर्ष बाजारों से इतर देखने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कोयंबत्तूर, कोच्चि, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर और भुवनेश्वर जैसे शहर आज रियल्टरों की पसंद बन रहे हैं।

एनारॉक समूह के प्रबंध निदेशक (कमर्शियल लीजिंग ऐंड एडवाइजरी) पीयूष जैन ने कहा, ‘इन बाजारों में ऑफिस लीजिंग पिछले तीन साल में लगातार बढ़ी है और वित्त वर्ष 2025 में यह गतिविधि वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है।’ 

उन्होंने कहा कि मझोले शहरों में परिचालन खर्च कम होता है। कब्जेदारों का एबिटा मार्जिन काफी बढ़ा है और लीजिंग की लागत बड़े शहरों के बाजारों के मुकाबले 30-50 प्रतिशत कम बनी हुई है। 

वै​श्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) का देश भर की कुल लीजिंग में 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है और ये केंद्र अब चुनिंदा तरीके से कोयंबत्तूर, कोच्चि, विशाखापट्टनम और जयपुर जैसे शहरों में भी विस्तार कर रहे हैं। 

फ्लेक्स वर्कस्पेस ऑपरेटर विस्तार की योजनाओं को एंटरप्राइज ऑक्यूपायर की विकेंद्रीकरण रणनीतियों के साथ ज्यादा से ज्यादा जोड़ रहे हैं। ऑफिस स्पेस सॉल्युशंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अमित रमानी ने कहा, ‘भारत के टियर-2 शहरों में जो तेजी दिख रही है, वह असली है और लगातार बढ़ रही है।’

टियर-2 शहरों में कंपनी की सीटों की संख्या में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि उद्यम अब भौगोलिक विविधता और ऑक्यूपेंसी की कम लागत की तलाश में हैं।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म वे​स्टियन के अनुसार मझोले  शहरों में 575 से ज्यादा सेंटर और 88 लाख वर्ग फुट का फ्लेक्स स्टॉक है। यह देश के कुल फ्लेक्स सेंटरों का लगभग 29 प्रतिशत और पूरे भारत के फ्लेक्स स्टॉक का 9 प्रतिशत से ज्यादा है।

मझोले शहरों में फ्लेक्स सेंटरों का लगभग दसवां हिस्सा जीसीसी आधारित परिचालन को सेवाएं देता है। इन शहरों में फ्लेक्स स्पेस महानगरों की तुलना में 50 प्रतिशत तक की लागत बचत मुहैया कराते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मेट्रो शहरों में बढ़ते किराये के कारण यह बदलाव तेजी से हो रहा है।

First Published : March 29, 2026 | 10:52 PM IST