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वीर विक्रम यादव संभालेंगे DGCA की कमान, विमानन संकटों के बीच नए महानिदेशक की नियुक्ति

केंद्र सरकार ने वीर विक्रम यादव को नया डीजीसीए प्रमुख नियुक्त किया है। उनके सामने विमानन सुरक्षा सुधारने और पायलट ड्यूटी नियमों के विवाद को सुलझाने की बड़ी चुनौती है

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दीपक पटेल   
Last Updated- March 31, 2026 | 10:33 PM IST

केंद्र सरकार ने मंगलवार को वीर विक्रम यादव को नया नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) नियुक्त किया है। वे फैज अहमद किदवई की जगह लेंगे, जिन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। जनवरी 2025 से इस पद पर रहे किदवई का कार्यकाल काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस दौरान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को कई बड़े विमानन संकट, नियामकीय टकराव और संस्थागत जांच का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2025 के मध्य से 2026 की शुरुआत तक की घटनाओं ने भारत की विमानन सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गहरी समस्याओं को उजागर किया। सबसे बड़ा झटका 12 जून 2025 को एयर इंडिया विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद लगा। अहमदाबाद से लंदन जा रहा बोईंग 787-8 विमान, उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें करीब 260 लोगों की मौत हो गई।

इस हादसे के बाद कई एजेंसियों ने जांच शुरू की और जुलाई 2025 में डीजीसीए ने एयर इंडिया की विस्तृत सुरक्षा जांच की। इस जांच में लगभग 100 तरह की सुरक्षा खामियां सामने आईं। इनमें पायलट प्रशिक्षण, केबिन क्रू की तैनाती और उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) के नियमों में उल्लंघन जैसे गंभीर मामले शामिल थे। हालांकि वर्ष 2025 के दौरान डीजीसीए एक और बड़े मुद्दे से जूझ रहा था जो पायलट की ड्यूटी और आराम के नियमों (एफडीटीएल) में बदलाव से जुड़ा था।

सुरक्षा हित में इन नियमों को सख्त करने के प्रयास का विमानन कंपनी ने विरोध किया जबकि पायलट संगठनों ने इसे और सख्ती से लागू करने की मांग की। इससे पूरे विमानन क्षेत्र में टकराव की स्थिति बन गई। बार-बार की देरी और लंबी चर्चाओं ने यह दिखाया कि सुरक्षा सुधारों को लागू करना आसान नहीं है क्योंकि इससे विमानन कंपनियों के संचालन पर असर पड़ सकता है।

उड़ान ड्यूटी समय-सीमा (एफडीटीएल) और पायलटों की उपलब्धता को लेकर चल रहा तनाव आखिरकार 1 दिसंबर 2025 से इंडिगो में शेड्यूलिंग संकट के रूप में सामने आया। यह संकट नवंबर 2025 में संशोधित नियम पूरी तरह लागू होने के तुरंत बाद शुरू हुआ। इंडिगो ने सख्त किए गए एफडीटीएल नियमों के अनुसार पायलटों की भर्ती नहीं बढ़ाई थी, जिसके कारण उसे पायलट की भारी कमी का सामना करना पड़ा। इसके चलते करीब 10 दिनों में लगभग 4,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। 

स्थिति को संभालने के लिए डीजीसीए को हस्तक्षेप करना पड़ा और नियामक ने अस्थायी रूप से एफडीटीएल नियमों में ढील दी, किराये की सीमा तय की और संचालन पर कड़ी निगरानी रखी। यह दबाव 28 जनवरी 2026 तक जारी रहा जब एक बड़े हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार समेत चार अन्य लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना उस समय हुई जब चार्टर्ड विमान लियरजेट 45 बारामती में उतरने की कोशिश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मुंबई से आ रहा यह विमान खराब कोहरे की स्थिति के कारण रनवे से ठीक पहले गिर गया और इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई।

यह हादसा राजनीतिक हलचल बढ़ाने वाला रहा क्योंकि इसमें राज्य के एक प्रमुख नेता की मृत्यु हुई। इसके चलते गैर-नियोजित चार्टर्ड विमान सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे, खासकर छोटे हवाईअड्डों पर जहां बुनियादी सुविधाएं सीमित होती हैं।

First Published : March 31, 2026 | 10:33 PM IST