उद्योग

पश्चिम एशिया संकट से लिकर इंडस्ट्री पर मार, मार्जिन और ग्रोथ दोनों पर दबाव

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक इस वित्त वर्ष EBITDA मार्जिन 150–200 बेसिस पॉइंट घटने की संभावना, रेवेन्यू ग्रोथ भी गिरकर 5 से 7 फीसदी रह सकती है।

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- April 22, 2026 | 3:35 PM IST

पश्चिम एशिया संकट का असर लिकर इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। पैकेजिंग महंगी होने भारत में अल्कोहलिक बेवरेज बनाने वाली कंपनियों यानी लिकर इंडस्ट्री के EBITDA मार्जिन में इस वित्त वर्ष 150–200 बेसिस पॉइंट की गिरावट आने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट से आपूर्ति शृंखला प्रभावित होना और पैकेजिंग लागत खासकर कांच की बोतलों की कीमत बढ़ना है।

मार्जिन घटकर 11.5 से 12% रहने की संभावना

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक जयश्री नंदकुमार के अनुसार, इस वित्त वर्ष कांच की बोतलों की कीमत औसतन 20% बढ़कर 280–300 रुपये प्रति केस तक पहुंचने की उम्मीद है। चूंकि लिकर इंडस्ट्री अत्यधिक विनियमित है और निर्माता लागत वृद्धि को पूरी तरह ग्राहकों तक नहीं पहुंचा सकते। इसलिए स्पिरिट्स सेगमेंट में ऑपरेटिंग मार्जिन 140–180 आधार अंक घटने और बीयर सेगमेंट में 250–300 आधार अंकों की तक गिरावट आने की संभावना है। कुल मिलाकर उद्योग का सम्मिलित मार्जिन इस वित्त वर्ष घटकर 11.5–12% रह सकता है बशर्ते आपूर्ति बाधाएं वित्त वर्ष की पहली छमाही तक बनी रहें और खुदरा कीमतों में बड़ा संशोधन न हो।

रेवेन्यू ग्रोथ रफ्तार भी पड़ेगी धीमी

लिकर इंडस्ट्री की रेवेन्यू ग्रोथ भी धीमी होकर 5–7% रहने का अनुमान है, जबकि पिछले तीन वित्त वर्षों में यह 11% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा था। बोतलों की उपलब्धता में कमी इसका प्रमुख कारण है। यह आकलन क्रिसिल रेटिंग्स के 31 लिकर बनाने वाली कंपनियों (जिनमें 10 सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं) के अध्ययन पर आधारित है। ये कंपनियां संगठित अल्कोबेवरिज इंडस्ट्री के लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू में 30% हिस्सेदारी रखती हैं।

कांच की बोतलों की कमी से बढ़ी पैकेजिंग लागत

क्रिसिल ने अपने अध्ययन में कहा कि लिकर इंडस्ट्री में स्पिरिट्स और बीयर का हिस्सा 95% से अधिक है। बीयर सेगमेंट में पैकेजिंग लागत शुद्ध राजस्व का लगभग 35% है, जबकि स्पिरिट्स में यह करीब 25% है। पैकेजिंग लागत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा कांच की बोतलों पर खर्च होता है। पश्चिम एशिया संकट के कारण लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो कांच की बोतलें बनाने के लिए अहम कच्चा माल है। इसके चलते कांच निर्माताओं ने उत्पादन में 35–40% तक कटौती कर दी है, जिससे विभिन्न उद्योगों में कांच की बोतलों की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इन्वेंटरी घटने से वर्किंग कैपिटल को अस्थायी राहत

युद्ध शुरू होने के बाद से पैकेजिंग इन्वेंटरी धीरे-धीरे कम हो रही है। आमतौर पर कंपनियां 50–60 दिनों का पैकेजिंग स्टॉक रखती हैं, जो अब घटकर 20–30 दिन रह सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर सजेश केवी ने कहा कि कम इन्वेंटरी के कारण अल्पावधि में वर्किंग कैपिटल की कुछ राशि मुक्त होगी, जिससे तरलता में थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि यदि संकट लंबा खिंचता है तो आपूर्ति और सख्त हो सकती है, जिससे कीमतों और खरीद रणनीतियों पर और दबाव पड़ेगा।

बैलेंस शीट फिलहाल मजबूत

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, कर्ज के सहारे पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) योजनाएं चलने के बावजूद पहले की तरह सतर्क कर्ज प्रबंधन के कारण कंपनियों की बैलेंस शीट स्वस्थ रहने की संभावना है। इस वित्त वर्ष ब्याज कवरेज अनुपात लगभग 6.8 गुना रहने का अनुमान है, जबकि कंपनियों पर बाहरी कर्ज उनकी वास्तविक शुद्ध संपत्ति के मुकाबले बहुत ज्यादा नहीं होगा। यह अनुपात लगभग 0.75 गुना के भीतर नियंत्रित रहने की संभावना है। आगे की स्थिति काफी हद तक पश्चिम एशिया में जारी संकट की दिशा, उत्पाद शुल्क से जुड़े संभावित नियामकीय बदलावों और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।

First Published : April 22, 2026 | 3:35 PM IST