उद्योग

पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर ‘कंटेनर जाम’: 30 हजार से ज्यादा बॉक्स फंसे, निर्यातकों की बढ़ी धड़कनें

ईरान से तेल-गैस टैंकरों की आवक बढ़ने से पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर 30,000 कंटेनर फंस गए हैं, जिससे निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है

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ध्रुवाक्ष साहा   
Last Updated- March 15, 2026 | 10:05 PM IST

भारत और ईरान के बीच विशेष समझौते के तहत तेल और गैस टैंकरों का भारत की ओर आवागमन शुरू होने के बाद बंदरगाह पर कंटेनरों की भीड़ लग गई है। इन टर्मिनलों पर बढ़ती भीड़ से निर्यातक परेशान हैं। सप्ताहांत में, भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक, शिवालिक और नंदा देवी, लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और सोमवार व मंगलवार को भारत पहुंचने वाले हैं। 

माल ढुलाई उद्योग के अधिकारी ने कहा, “तेल टैंकरों और एलपीजी जहाजों को तो गुजरने की अनुमति दे दी गई है, लेकिन हम अधिकारियों से कंटेनरों की आवाजाही सुनिश्चित करने का अनुरोध कर रहे हैं।’ 

उन्होंने बताया कि न्हावा शेवा/जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) और कांडला बंदरगाह (दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण) जैसे बंदरगाहों पर भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर 30,000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं। ओस्लो स्थित शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म ज़ेनेटा के अनुसार कांडला बंदरगाह पर भीड़भाड़ 100 प्रतिशत है और फर्म के पोर्ट कंजेशन ट्रैकर द्वारा इसे गंभीर स्थिति में चिह्नित किया गया है। बंदरगाह पर वर्तमान में औसत प्रतीक्षा समय 2.1 दिन है।

First Published : March 15, 2026 | 10:05 PM IST