प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
इंजीनियरिंग पेशेवरों के लिए यह साल बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, जिसमें न केवल छंटनी करने वाले उद्यमों की संख्या बढ़ी है बल्कि यह प्रक्रिया पहले के मुकाबले तेज भी हुई है। कामकाज में एआई को अपनाने की वजह से नौकरी बाजार की तस्वीर किस तरह बदल रही है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस वर्ष की शुरुआत से अब तक यानी लगभग 4 महीने में 92 कंपनियां 92,272 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं।
सबसे अधिक छंटनी इस वर्ष मार्च में देखी गई है। लेऑफ्स डॉट फाई के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने यानी अप्रैल में ही 45,800 कर्मचारियों को निकाला जा चुका है। यह जनवरी 2024 के पिछले रिकॉर्ड 34,137 नौकरियों में कटौती से कहीं बड़ा आंकड़ा है। इस बार जो रुझान सामने आ रहे हैं, उनमें खास यह है कि प्रति कंपनी छंटनी की प्रक्रिया बढ़ी है। मार्च में 29 कंपनियों ने अपने कार्यबल में कटौती की है, जबकि जनवरी 2024 में इस प्रक्रिया में 123 कंपनियां शामिल थीं ।
इस साल अभी तक सबसे बड़ी छंटनी तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा में सामने आ रही है, जो 20 मई से अपने 10 प्रतिशत कार्यबल, यानी 8,000 लोगों को नौकरी से निकाल रही है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने 6,000 रिक्त भूमिकाओं के लिए भर्ती पर भी रोक लगाने का ऐलान किया है।
इस बीच, माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में अपने कर्मचारियों को वॉलंट्री बायआउट यानी स्वैच्छा से नौकरी छोड़ने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कंपनी पहली बार इस तरह अपने कार्यबल से लगभग 7 प्रतिशत कर्मचारियों को स्थायी रूप से घर भेजने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने जब से एआई में निवेश करना शुरू किया है तब से वह कई बार छंटनी कर चुकी है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट का यह फैसला केवल अमेरिकी कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि मेटा की छंटनी का भारत पर भी असर पड़ेगा या नहीं। बड़ी तकनीकी कंपनियां एआई पर निवेश बढ़ाने एवं अपने डेटा सेंटर का विस्तार करने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। ऐसे में लागत में कटौती के उपायों के तहत ये छंटनी का सहारा ले रही हैं।
कंपनियों में लगातार छंटनी का असर भारत के पेशेवर जगत पर भी पड़ रहा है। स्पेशलिस्ट स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो के सह-संस्थापक कमल कारंत ने कहा, ‘कंपनियां सतर्कता से भर्ती कर रही हैं। कर्मचारी भी सतर्क रुख अपना रहे हैं। नौकरी बाजार में लगातार सुस्त माहौल दिख रहा है। बड़ी बात है कि सभी कंपनियां और पेशेवर बदलते माहौल को समझ रहे हैं और उसी अनुसार सावधानीपूर्वक कदम उठा रहे हैं।’
कारंत ने हालात का बड़ा दिलचस्प अवलोकन किया है। वह कहते हैं कि नियमित छंटनी का ‘शॉक-ऐंड-ऑव’ फैक्टर खत्म हो गया है। जब कोई ब्रांड छंटनी की घोषणा करता है, तो यह बड़ा सोचा-समझा कदम होता है।
वह कहते हैं, ‘छंटनी को अब बहुत बुरी नजर से नहीं देखा जा रहा है। पेशेवर भी इस बारे में चर्चा करने और इससे निपटने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार दिख रहे हैं। पेशेवर नौकरी के बारे में बातचीत तभी कर रहे हैं जब मामला ऐसी कंपनी से जुड़ा हो जो भर्ती और छंटनी की प्रक्रिया एक साथ चला रही हो। यह दुर्लभ स्थिति है जब कंपनी एक तरफ कर्मचारियों को निकाल रही है और दूसरी तरफ भर्ती भी कर रही हो।’
यह भी सच है कि नौकरी जाने का जोखिम बने रहने के बावजूद पेशेवर इन बड़ी तकनीकी कंपनियों में काम करना चाहेंगे।