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AI से बढ़ा खतरा, भारत के फिनटेक सेक्टर में साइबर सुरक्षा को लेकर अलर्ट

एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथोस मॉडल की उन्नत क्षमताओं को देखते हुए भारत के फिनटेक सेक्टर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी और कंपनियों को सतर्क रहने को कहा गया

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- April 17, 2026 | 8:43 AM IST

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथोस से जुड़े शुरुआती खतरे महसूस होने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, फिनटेक स्व-नियामकीय संगठन फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (फेस) ने सबसे पहले इस पर कार्रवाई की है। उसने अपने सदस्यों से साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और सॉफ्टवेयर में संभावित कमजोरियों को दूर करने का आग्रह किया है।

फेस ने साइबर हमलों या खतरों के बारे में संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचित करने, समाधानों को लगातार अपनाने और जीरो-डे वल्नरबिलिटी इंटेलिजेंस जैसे उपायों की सिफारिश की है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब क्लॉड मिथोस प्रीव्यू ने इंटेलिजेंस की उल्लेखनीय क्षमता दिखाई है जिसमें सॉफ्टवेयर वल्नरबिलिटी की पहचान करने और उनका फायदा उठाने की क्षमता है।

क्लॉड मिथोस प्रीव्यू सामान्य उद्देश्य वाला एक फ्रंटियर मॉडल है जिसे अभी जारी नहीं किया गया है। इनमें जीरो-डे वल्नरबिलिटी भी शामिल है जो सॉफ्टवेयर की ऐसी समस्याएं हैं जिनके बारे में डेवलपरों को पहले से पता नहीं था। मगर उससे वित्तीय सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं।

फेस के सीईओ सुगंध सक्सेना ने अपने सदस्यों को जारी एक ईमेल में कहा, ‘क्लॉड मिथोस से संबंधित हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में हम अपने सदस्यों से आवश्यक एवं रक्षात्मक उपायों को बेहतर करने का अनुरोध करते हैं।’ बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी उस ईमेल को देखा है। इस मामले में टिप्पणी के लिए फेस को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया। फेस भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त देश का पहला फिनटेक एसआरओ है।

उम्मीद की जा रही है कि फेस इस मुद्दे पर गुरुवार को अपने सदस्यों के लिए एक वेबिनार का आयोजन करेगा। फिनटेक जगत में फेस के सदस्यों की संख्या 275 से अधिक है। उसकी वेबसाइट के अनुसार, साल 2030 तक 1,000 फिनटेक कंपनियों को जोड़ने की योजना है।

एक फिनटेक के संस्थापक ने कहा, ‘यह उन एआई मॉडलों के संदर्भ में फेस द्वारा उठाया गया एक प्रगतिशील कदम है जो वित्तीय सेवा परिवेश के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।’ एंथ्रोपिक ने एक ब्लॉग में कहा है कि मिथोस प्रीव्यू ने जबरदस्त गंभीरता वाली हजारों कमजोरियों का पता लगाया है जिसमें से कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में शामिल हैं।’

यह चिंताजनक है क्योंकि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों की लगातार हो रही प्रगति के कारण ऐसी क्षमताएं गलत हाथों में पड़ सकती हैं। इससे भारत और दुनिया भर में सॉफ्टवेयर सिस्टम की स्थिरता के बारे में चिंताएं बढ़ सकती हैं।

इन चिंताओं के जवाब में एंथ्रोपिक ने प्रोजेक्ट ग्लास विंग की घोषणा की है। इसमें एक दर्जन कंपनियां शामिल हैं जो रक्षात्मक सुरक्षा कार्य के तहत मिथोस का उपयोग कर सकती हैं। इस पहल में एमेजॉन वेब सर्विसेज, एंथ्रोपिक, ऐपल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल, जेपी मॉर्गन चेस, द लिनक्स फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और पालो ऑल्टो नेटवर्क्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

First Published : April 17, 2026 | 8:43 AM IST