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IT सेक्टर की रफ्तार पर ब्रेक? युद्ध और मंदी की आहट से Q4 में सुस्त रहेगी दिग्गज कंपनियों की ग्रोथ

चौथी तिमाही पारंपरिक रूप से सुस्त तिमाही होती है। यह तिमाही उद्योग के लिए पहले से ही निवेशकों की धारणा में बड़े बदलाव के साथ उथल-पुथल भरी अवधि रही है

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अविक दास   
Last Updated- March 30, 2026 | 10:00 PM IST

भारतीय आईटी सेवा कंपनियां वित्त वर्ष 2026 का समापन कमजोर चौथी तिमाही के साथ कर रही हैं। अस्थिर व्यापक आर्थिक माहौल के बीच उनकी वृद्धि दर धीमी रहने की संभावना है। पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध नई चिंता बनकर उभरा है। इससे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई की चिंता गहरा रही है और व्यापक वैश्विक मंदी का जोखिम बढ़ रहा है।

चौथी तिमाही पारंपरिक रूप से सुस्त तिमाही होती है। यह तिमाही उद्योग के लिए पहले से ही निवेशकों की धारणा में बड़े बदलाव के साथ उथल-पुथल भरी अवधि रही है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के अंत में कंपनियों की टिप्पणियों के अनुसार मांग और ग्राहक खर्च में सुधार के संकेत थे, लेकिन फरवरी में जेनरेटिव आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित असर से जुड़ी चिंताओं के कारण यह पलट गया। इस कारण मूल्यांकन और शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट आई। 

जेएम फाइनैंशियल की एक रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च को समाप्त तिमाही में शीर्ष पांच कंपनियों के -0.7 से 7.4 फीसदी के बीच बढ़ने का अनुमान है, जबकि मझोले आकार की कंपनियां स्थिर मुद्रा आधार में 3 से 22 फीसदी की ऊंची दर से बढ़ सकती हैं। जेपीमॉर्गन और सीएलएसए ने तिमाही आधार पर यह वृद्धि -1.6 से 2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया है। 

जेएम फाइनैंशियल की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जहां एक ओर जेनरेटिव एआई निवेशकों के लिए ढांचागत चिंता का मसला है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया संकट ने अल्पावधि के जोखिमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, हमारा मानना है कि निवेशक संभवतः वित्त वर्ष 2027 के राजस्व अनुमानों और ऑर्डरबुक पर अपना ध्यान देंगे।’

युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है। अभी तक इसके थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अगर यह लंबा खिंचा तो इसका असर सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा और दुनिया भर के ग्राहक अपने कम जरूरी खर्चों में कटौती करेंगे और इस बेहद अस्थिर माहौल में लागत कम करने पर ध्यान देंगे।

इस क्षेत्र के लिए अच्छी बात यह है कि रुपया कमजोर हो रहा है। इससे, कम समय के लिए ही मुनाफे में मदद मिलेगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में हर 1 प्रतिशत की गिरावट से रुपये में होने वाली कमाई में बढ़ोतरी होती है और परिचालन लाभ लगभग 20-30 आधार अंक तक बढ़ सकता है।

अनर्थइनसाइट का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही ज्यादातर भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए सुस्त रहने की उम्मीद है। फर्म के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में 3-5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। 

First Published : March 30, 2026 | 10:00 PM IST