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‘AI की दुनिया में मुनाफे वाला प्रोडक्ट बनाना मुमकिन’, OpenAI के थॉमस जेंग ने किया बड़ा दावा

थॉमस जेंग ने कहा कि हमने कई कंपनियों को बहुत मजबूत सकल मार्जिन हासिल करते देखा है, भले ही वे अपने मूल उत्पादों में एआई को शामिल कर रही हैं

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शिवानी शिंदे   
अजिंक्या कवाले   
Last Updated- May 30, 2026 | 10:01 AM IST

ओपनएआई में स्टार्टअप्स के प्रमुख थॉमस जेंग का मानना है कि अगर स्टार्टअप्स लंबी अवधि का दृष्टिकोण अपनाते हैं तो टोकन लागत में वृद्धि की चिंता उनके लिए बाधा नहीं बनेगी।

थॉमस जेंग ने कहा, ‘हमने कई कंपनियों को बहुत मजबूत सकल मार्जिन हासिल करते देखा है, भले ही वे अपने मूल उत्पादों में एआई को शामिल कर रही हैं। यह पूरी तरह से संस्थापकों की सोच पर निर्भर करेगा कि वे अपने प्रोडक्ट को कैसे तैयार कर रहे हैं और उनकी बिजनेस रणनीति क्या है। एक मुनाफे वाला उत्पाद बनाना नामुमकिन नहीं है। हम कंपनियों के साथ जो भी काम करते हैं, उसमें उन्हें ज्यादा टिकाऊ आर्थिकी  तक पहुंचने में मदद करना होता है।’

वह मुंबई टेक वीक (एमटीडब्ल्यू) ​​के दौरान बिजनेस स्टैंडर्ड से बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों को एआई टूल्स को इंसानी प्रतिभा का सीधा विकल्प नहीं समझना चाहिए। जेंग ने कहा कि कोडेक्स जैसे एआई टूल उत्पादकता बढ़ाने वाले होते हैं, जिनकी मदद से इंजीनियर और डेवलपर तेजी से काम कर पाते हैं और बड़े बाजारों तक पहुंच बना लेते हैं। भारत में स्टार्टअप तंत्र का लाभ उठाना कंपनी के लिए देश में उसके मुख्य फोकस क्षेत्रों में से एक है।

ओपनएआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2026 की शुरुआत से अब तक भारत में कोडेक्स के साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या में 27 गुना की वृद्धि हुई है, जबकि अप्रैल के अंत तक दैनिक इंटरैक्शन में 20 गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कोडेक्स को अपनाने के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष पांच देशों में और कोडेक्स के साथ जुड़ाव के संदर्भ में शीर्ष 10 देशों में बना हुआ है। आंकड़ा यह भी दिखाता है कि भारत में कोडेक्स की भूमिका का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। कोडेक्स के लिए आने वाले एक-चौथाई से ज्यादा अनुरोध नॉन-कोडिंग कामों के लिए होते हैं, जो पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट वर्कफ्लो से हटकर इसके बढ़ते इस्तेमाल को दिखाता है। लोग कोडेक्स का इस्तेमाल जानकारी को इकट्ठा करने, दस्तावेजों का ड्राफ्ट बनाने, रोजाना के रिसर्च कार्यों को ऑटोमेट करने और वर्कफ्लो व बातचीत को व्यवस्थित करने के लिए कर रहे हैं।

फरवरी में, ओपनएआई सिग्नल्स ने पाया कि भारत में कोडिंग के कार्यों के लिए कोडेक्स का इस्तेमाल वैश्विक औसत से लगभग 3 गुना अ​धिक था, जबकि कोडिंग से जुड़े सवाल वैश्विक औसत से लगभग 3 गुना ज्यादा थे।

First Published : May 30, 2026 | 10:01 AM IST