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जैक्सन ग्रुप 2028 तक 3 गीगावॉट सोलर वेफर क्षमता करेगा स्थापित, ग्रीन एनर्जी में बड़ा विस्तार

कंपनी अब अपनी सहायक इकाइयों के जरिये जैव ईंधन, इलेक्ट्रोलाइजर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) और ग्रीन मॉलिक्यूल्स जैसे नए जमाने के हरित ऊर्जा क्षेत्रों में भी विस्तार

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नंदिनी केशरी   
Last Updated- April 16, 2026 | 8:22 AM IST

हरित ऊर्जा एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी जैक्सन ग्रुप वर्ष 2028 तक 3 गीगावॉट की सोलर वेफर और इंगट निर्माण क्षमता शुरू करने की योजना बना रही है। यह कदम सरकार की ‘अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स ऐंड मैन्युफैक्चरर्स’ (एएलएमएम) लिस्ट-3 नियमों के अनुरूप है। इसके साथ ही कंपनी ने ‘बैकवर्ड इंटीग्रेशन’ की दिशा में भी अपने प्रयास और तेज कर दिए हैं। कंपनी अब अपनी सहायक इकाइयों के जरिये जैव ईंधन, इलेक्ट्रोलाइजर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) और ग्रीन मॉलिक्यूल्स जैसे नए जमाने के हरित ऊर्जा क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। जैक्सन ग्रुप के चेयरमैन समीर गुप्ता ने नंदिनी केशरी के साथ साक्षात्कार में यह जानकारी दी। बातचीत के मुख्य अंश …

ग्रुप ने हाल में मध्य प्रदेश के मक्सी में 6 गीगावॉट की सौर निर्माण इकाई का निर्माण शुरू किया है। यह संयंत्र कब तक शुरू हो जाएगा?

हमने लगभग पांच महीने पहले 113.5 एकड़ जमीन ली थी। नवंबर में इसका शिलान्यास हुआ था। ज्यादातर मंजूरियां मिल चुकी हैं। पर्यावरण मंजूरी 4-5 महीनों में मिल जाने की उम्मीद है। मशीनरी के ऑर्डर की प्रक्रिया चल रही है और 2-3 महीनों में कॉन्ट्रैक्ट हो जाएंगे। इंजीनियरिंग और ड्रॉइंग का काम भी चल रहा है। यह प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पांच साल में हमारा लक्ष्य लगभग 8,000 करोड़ रुपये के निवेश से 5 गीगावॉट की एक एकीकृत इकाई तैयार करना है। पहले चरण में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। हम सेल से शुरुआत करेंगे। हमें उम्मीद है कि सेल इकाई मई-जुलाई 2027 के आस-पास तैयार हो जाएगी। मॉड्यूल बनाने की क्षमता पहले से ही है। इसे तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही, कंपनी इंगॉट्स और वेफर्स के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन का काम भी जारी रखेगी।

क्या आपकी पॉलिसिलिकन विनिर्माण में उतरने की योजना है?

अभी तो नहीं। हालांकि, बैकवर्ड इंटीग्रेशन एक मुख्य रणनीति है। इसलिए जैसे-जैसे व्यवसाय विकसित होगा, हम भविष्य में इस पर विचार कर सकते हैं।

ऊंची उत्पादन लागत से मॉड्यूल की कीमतों में वृद्धि हो रही है जो ईरान युद्ध और बढ़ गई है। इस पर आपका क्या कहना है?

मूल्य में उतार-चढ़ाव जरूरी नहीं कि भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़े हों। वे एल्युमीनियम, तांबा और चांदी जैसी कमोडिटी की कीमतों से चलते हैं। पिछले 10 वर्षों में मॉड्यूल की कीमतों में काफी गिरावट आई है। ये पहले के स्तरों के मुकाबले लगभग 20-25 प्रतिशत तक घटी हैं। अल्पावधि उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। लेकिन लंबी अवधि में क्षमता बढ़ाने से उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इसलिए, यह कोई बड़ी चिंता नहीं है।

घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने में पीएलआई और एएलएमएम जैसी सरकारी योजनाएं कितनी मददगार हैं?

ये न सिर्फ अल्पावधि के लिहाज से मददगार हैं बल्कि लंबे समय में भी इनसे मदद मिलती है। हरेक उद्योग को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जो देश के लिए अच्छा है, वही व्यवसाय के लिए भी अच्छा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए, भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना महत्त्वपूर्ण है। ये योजनाएं उस लक्ष्य की ओर प्रेरक माध्यम हैं और हम सरकार की सोच के साथ पूरी तरह सहमत हैं।

आपने हाल में बीईएसएस और सोलर किट जैसे नए उत्पाद पेश किए हैं। अगले 2-3 साल में आप और क्या ला रहे हैं और आपके लक्ष्य क्या हैं?

हमने नए उत्पाद पेश किए हैं। इनमें 5 केवीए रेटिंग का एक छोटा जेनसेट, उसी जेनसेट पर आधारित मोबाइल लाइटिंग टावर, इन्वर्टर के साथ एक सोलर किट शामिल है। यह सोलर किट ऐसा है जिसे तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा बीईएसएस रेंज भी है, जो एक बैटरी-पैक सॉल्युशन है जिसे भी तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है। हमारी योजना पहले से ही चल रही है। हमने उत्पादन शुरू कर दिया है। ज्यादातर उत्पाद स्टॉक में उपलब्ध हैं। हम अपने वेयरहाउस में इन्वेंट्री तैयार कर रहे हैं और दुनिया भर में डीलर नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।

First Published : April 16, 2026 | 8:22 AM IST