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JSW Steel बनेगी दुनिया की टॉप स्टील कंपनी! 7.8 करोड़ टन क्षमता का बड़ा प्लान

JSW Steel भारत में बड़े विस्तार के जरिए अपनी क्षमता 7.8 करोड़ टन तक बढ़ाकर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में शामिल होने की तैयारी कर रही है।

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ईशिता आयान दत्त   
Last Updated- May 18, 2026 | 8:52 AM IST

जेएसडब्ल्यू स्टील भारत में विस्तार की शुरुआत कर रही है। उसका मकसद संयुक्त उद्यमों समेत अपनी मौजूदा क्षमता 3.64 करोड़ टन से बढ़ाकर 7.8 करोड़ टन तक करना और चीन के बाहर शीर्ष दो उत्पादकों में शामिल होना है। कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य
अधिकारी जयंत आचार्य ने ईशिता आयान दत्त के साथ ऑडियो बातचीत में बताया कि देश की आर्थिक वृद्धि की गाथा उसे विकास की इस राह पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दे रही है। संपादित अंश …

स्टील की कीमतों में तेजी का रुख रहा है। आगे का नजरिया क्या है?

जेएसडब्ल्यू स्टील के मामले में वित्त वर्ष 26 बदलाव वाला साल रहा है। बाहरी चुनौतियों के बावजूद हमने परिचालन को लेकर दमदार प्रदर्शन दर्ज किया है। हमने वैश्विक स्तर पर स्टील की प्रमुख कंपनियों के साथ रणनीतिक संयुक्त उद्यम किए हैं – भूषण पावर ऐंड स्टील (बीपीएसएल) परिसंपत्ति में जेएफई के साथ और पोस्को के साथ संयुक्त उद्यम पूरा किया। ये दोनों भारत में वृद्धि का दोहरा इंजन बनेंगे।

हमने पिछले साल अपना क्षमता विस्तार शुरू किया यानी उत्कल, कडप्पा, डाउनस्ट्रीम निवेश और जेवीएमएल (जेएसडब्ल्यू विजयनगर मेटेलिक्स लिमिटेड) परिसंपत्तियों का विस्तार। साथ ही हम अपने कच्चे माल को सुरक्षित कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह कि हमने बीपीएसएल परिसंपत्तियों की बिक्री के बाद अपनी बैलेंस शीट को काफी मजबूत किया है। इन चीजों से वृद्धि के अगले स्तर का आधार बनता है।

जेएसडब्ल्यू स्टील को 6.2 करोड़ टन और भारत में संयुक्त उद्यमों सहित 7.8 करोड़ टन तक पहुंचाने के जिस बढ़ोतरी की राह का हम अनुमान लगा रहे हैं, उससे हम दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में से एक बन जाएंगे। यह दीर्घकालिक कहानी भारत की विकास गाथा में हमारे भरोसे पर आधारित है।

इस विस्तार के साथ जेएसडब्ल्यू स्टील वैश्विक नक्शे पर कहां होगी?

अगर आप प्रमुख देशों के उत्पादन को देखें, तो हमारी क्षमता शायद अमेरिका या जापान के उत्पादन के समान होगी, जो तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। इसलिए यह अहम कदम है। हम शायद चीन को छोड़कर शीर्ष दो में होंगे।

सालाना और तिमाही आधार पर स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। निकट भविष्य के लिए आपकी क्या उम्मीदें हैं?

दिसंबर तिमाही के निचले स्तरों से जनवरी-मार्च के बीच कीमतें लगातार बढ़ीं। इसे भारत में सीजनल मांग के साथ-साथ सुरक्षा शुल्क से भी मदद मिली। कीमतों में इस बढ़ोतरी का कुछ असर चौथी तिमाही में दिखा है। बाकी असर पहली तिमाही (वित्त वर्ष 27 की पहली) में दिखेगा। लागत भी बढ़ चुकी है और इसका असर भी पहली तिमाही में दिखेगा। लेकिन हम कीमतों और मार्जिन में बढ़ोतरी से इसकी भरपाई कर सकेंगे।

घरेलू बाजार में स्टील की कीमतों की मजबूती में संरक्षण शुल्क कितना मददगार रहा है?

सुरक्षा शुल्क उद्योग के लिए स्थिर माहौल मुहैया कराने में सक्षम रहा है। दुनिया कुछ समय से 25 से 50 प्रतिशत के दायरे में सुरक्षा उपाय लागू कर रही है। भारत में हम कही ज्यादा संतुलित हैं। लेकिन इससे हमें भारत में विस्तार करने का नजरिया और आत्मविश्वास मिलता है। आज हम जो वैश्विक अस्थिरता देखते हैं, उसे कम करने के लिए देश के भीतर आपूर्ति श्रृंखलाओं को विकसित करने की आवश्यकता है। स्टील बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, नवीकरणीय क्षेत्रों का निर्माण खंड है। ये ऐसे अहम क्षेत्र हैं जिन्हें देश के भीतर आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है।

रुपये की गिरावट का जेएसडब्ल्यू स्टील पर क्या प्रभाव है, खास तौर पर इनपुट लागतों पर?

कोकिंग कोल और अन्य कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। लौह अयस्क की कीमतों में इजाफा शुरू हो चुका है। हालांकि हम मिश्रण बेहतर बनाने और विशिष्ट खपत कम करने में कामयाब रहे हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण फ्लक्स की कीमत बढ़ गई है। लॉजिस्टिक लागत में खासी वृद्धि हुई है और अंत में हमारे समूचे आयात घटकों पर विदेशी मुद्रा का असर पड़ा है।

First Published : May 18, 2026 | 8:52 AM IST