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LPG Supply Crisis: वाणिज्यिक तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडरों की आपूर्ति तंग होने के बीच रेस्तरां उद्योग लगभग 79,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कई रेस्तरां अपने आउटलेट बंद कर रहे हैं या फिर कारोबार चलाने के नाम पर काफी कम व्यंजन ही परोस पा रहे हैं। नैशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा किए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार रेस्तरां उद्योग को प्रति माह 79,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां 15-20 प्रतिशत तक कम हो गई हैं।
देश भर में 5 लाख से अधिक रेस्तरां का प्रतिनिधित्व करने वाले इस उद्योग संगठन के अनुसार देश के लगभग 10 प्रतिशत रेस्तरां अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं जबकि 60-70 प्रतिशत इंडक्शन स्टोव और वैकल्पिक ईंधनों के सहारे चल रहे हैं। रेस्तरांओं में काम कम हो गए हैं और व्यंजनों की फेहरिस्त छोटी की जा रही है।
इस सप्ताह की शुरुआत में स्टॉक एक्सचेंजों की दी जानकारी में डोमिनोज और पोपयेज का संचालन करने वाली जुबिलेंट फूडवर्क्स ने कहा कि उसे देश भर में व्यावसायिक एलपीजी के वितरण में आपूर्ति संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसमें कहा गया है,‘कंपनी के स्टोर नेटवर्क के कुछ हिस्सों में एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित हुई है। इस स्तर पर परिचालन पर सीमित असर हुआ है मगर इससे गंभीरता से निपटा जा रहा है। कंपनी एलपीजी संरक्षण के लिए कई कदम उठा रही है और बिजली और पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (पीएनजी) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने के लिए अथक प्रयास कर रही है।’
सूत्रों के अनुसार कई बड़ी क्यूएसआर श्रृंखलाएं एक विशेष क्षेत्र में सक्रिय स्टोरों की संख्या कम कर रही हैं।
एक रेस्तरां कारोबारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया,‘कई रेस्तरां कारोबार 50 प्रतिशत क्षमता पर चल रहे हैं। अगर उनके एक इलाके में तीन स्टोर हैं तो वे एक को अस्थायी रूप से बंद कर रहे हैं, दूसरे में काम के घंटे कम कर रहे हैं और तीसरा पहले की तरह ही चालू है।’ एक से अधिक स्टोर के डिलिवरी ऑर्डर भी केवल एक स्टोर से ही पूरे किए जा रहे हैं जिससे इसमें (डिलिवरी) में देरी हो रही है।
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खबरों के अनुसार, बाहर खाना खाने के रुझान में 8-10 प्रतिशत की गिरावट आई है और विकल्प सीमित होने के कारण प्रति ग्राहक औसत खर्च में भी 6-8 प्रतिशत की कमी आई है। कई इलाकों में सिलिंडरों की कालाबाजारी से ऊंची कीमतों पर खरीद के मामले भी सामने आए हैं। रेस्तरां उद्योग सेवा क्षेत्र में खुदरा और बीमा के बाद तीसरा सबसे बड़ा उद्योग है जिसका 2026 में अनुमानित कारोबार 6.46 लाख करोड़ रुपये है और यह 80 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। एनआरएआई का अनुमान है कि अगर संकट अनसुलझा रहता है, तो इस क्षेत्र में मौजूदा व्यवधान के कारण 5-7 लाख नौकरियां जा सकती हैं। रेस्तरां मालिक ने कहा, “हालांकि, हालात कुछ हद तक सुधरे हैं मगर अब हमारे पास कोई इंतजाम नहीं है और आपूर्ति अभी भी सीमित है। ऐसे में हम बस यही उम्मीद कर सकते हैं कि समस्या का जल्द समाधान हो जाए।