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बायोगैस को हाइब्रिड से ज्यादा मिले प्रोत्साहन, Maruti के चेयरमैन भार्गव का बड़ा बयान

मारुति सुजूकी चेयरमैन आरसी भार्गव ने बायोगैस वाहनों को हाइब्रिड से ज्यादा प्रोत्साहन देने की वकालत की और EV-हाइब्रिड टैक्स व एथेनॉल नीति पर अहम सुझाव दिए।

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सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- May 21, 2026 | 9:57 AM IST

मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव का कहना है कि बायोगैस से चलने वाले वाहनों को हाइब्रिड वाहनों की तुलना में सरकार से ज्यादा प्रोत्साहन मिलना चाहिए, क्योंकि ये नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करते हैं और खेती के लिए उपयोगी जैविक खाद भी बनाते हैं।

बायोगैस का इस्तेमाल स्वतंत्र रूप से कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के तौर पर किया जा सकता है, जो गाड़ियों को चलाने के लिए सीएनजी का विकल्प है। इसे जीवाश्म ईंधन-आधारित सीएनजी के साथ भी मिलाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बीच हमेशा जीएसटी का अंतर होना चाहिए और ईवी पर कम टैक्स लगना जारी रहना चाहिए। उन्होंने कुछ मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की उन मांगों को खारिज कर दिया, जिनमें इन दोनों के बीच कर समानता की मांग की गई थी।

भार्गव देश के सामने पैदा उस चुनौती पर प्रतिक्रिया कर रहे थे कि भारत भारी मात्रा में आयात किए जाने वाले जीवाश्म ईंधनों से हटकर विद्युतीकरण की ओर तेजी से कैसे बढ़े। यह समस्या अमेरिका-ईरान लड़ाई और तेल संकट के कारण अब और भी गहरी हो गई है।

बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए भार्गव ने कहा, ‘देश में बायोगैस में अपार संभावनाएं होने के बावजूद यह बिल्कुल भी लोकप्रिय नहीं हो पाई है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों को ऐसे संयंत्रों में निवेश करने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता, जो आसानी से उपलब्ध कृषि कचरे को बायोगैस में बदल सकें। इसलिए बायोगैस से चलने वाले वाहनों को जीएसटी में ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए या फिर प्रस्तावित ‘कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता’ (सीएएफई) नियमों में भी उन्हें अन्य वाहनों (जैसे हाइब्रिड) की तुलना में अधिक छूट मिलनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि पहले एक प्रोत्साहन योजना थी जिसके तहत तेल विपणन कंपनियां उत्पादकों से सीबीजी की खरीद की गारंटी देती थीं। लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थी। अब नई नीति तैयार की गई है, जिसे उन्होंने अधिक आकर्षक बताया।

उन्होंने कहा, ‘याद रखिए, ईवी के विपरीत, बायोगैस बनाने की प्रक्रिया से जैविक खाद भी बनती है, जिसकी खेती के लिए जरूरत होती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि बायोगैस का एक और फायदा यह है कि इससे कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल भी नहीं होता।

कुछ ओईएम की इस मांग पर कि हाइब्रिड गाड़ियों (जैसे प्लग-इन हाइब्रिड या रेंज-एक्सटेंडर ईवी) पर जीएसटी को पूरी तरह से बैटरी से चलने वाली ईवी के बराबर कर दिया जाए, भार्गव ने कहा, ‘इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों के बीच जीएसटी में हमेशा कुछ अंतर होना चाहिए। ईवी पर जीएसटी हमेशा कम होनी चाहिए, भले ही वे असल में पूरी तरह से शून्य उत्सर्जन सुनिश्चित न करती हों, क्योंकि चार्जिंग स्टेशनों को बिजली कोयले से चलने वाले प्लांट से मिलती है। हाइब्रिड गाड़ियों पर जीएसटी, ईवी की तुलना में ज्यादा होना चाहिए, लेकिन पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों की तुलना में कम होना चाहिए, क्योंकि वे सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाती हैं।’

सरकार के ई30 के रूप में एथेनॉल-पेट्रोल के ज्यादा मिश्रण के फैसले पर भार्गव ने कहा, ‘हमारे पास ई20 से ई30 पर जाने की तकनीक मौजूद है और इससे उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।’

हालांकि, उन्होंने यह बताया कि जो मौजूदा गाड़ियां 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन की गई हैं, वे गाड़ी के प्रदर्शन में बिना किसी गिरावट के ई30 का इस्तेमाल कर सकती हैं। फिर भी, उन्होंने फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की बड़े पैमाने पर संभावना को खारिज कर दिया, भले ही कई कंपनियों ने उनकी कमर्शियल उपयोगिता को साबित कर दिया हो। फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में, एथेनॉल मिश्रण 85 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। कई वाहन कंपनियों ने पहले ही ऐसी गाड़ियां पेश कर दी हैं।

लेकिन भार्गव ने कहा, ‘समस्या यह है कि गन्ना, मक्का और अन्य कच्चे माल की प्रोसेसिंग से पर्याप्त एथेनॉल उपलब्ध नहीं है। एथेनॉल मिश्रण के इतने ऊंचे स्तर के लिए बहुत बड़ी मात्रा की जरूरत होगी।’

First Published : May 21, 2026 | 9:57 AM IST