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NCLAT ने कहा, IBC ‘कर्ज वसूली’ का तंत्र नहीं, यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ याचिका खारिज की

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NCLAT ने इस महीने में दूसरी बार ऐसा निष्कर्ष दिया है।

Last Updated- September 17, 2023 | 4:40 PM IST
IBC में बदलाव, दिवाला प्रक्रिया को तेज करने के लिए न्यायाधिकरणों को मिलेगी मजबूती, Budget 2024-25 commits reforms to strengthen IBC, strengthen tribunals

दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) ‘वसूली’ का तंत्र नहीं है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने यूनाइटेड टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ उसके एक परिचालन ऋणदाता द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह निष्कर्ष दिया है। दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस महीने में दूसरी बार ऐसा निष्कर्ष दिया है। इससे पहले इसने विप्रो लिमिटेड के खिलाफ एक दिवाला याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

NCLAT ने उस समय कहा था कि दिवाला कानून का इस्तेमाल दिवालिया कंपनियों से कर्ज की वसूली के लिए नहीं किया जा सकता। पिछले सप्ताह यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ एक याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एम वेणुगोपाल और न्यायमूर्ति श्रीशा मेरला की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘‘बार-बार शीर्ष अदालत ने अपने निर्णयों में कहा कि IBC एक ‘वसूली तंत्र’ नहीं है।’’

NCLT की बेंगलूरु पीठ के एक आदेश को बरकरार रखा

इसके साथ ही अपीलीय न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बेंगलूरु पीठ के एक आदेश को बरकरार रखा है। NCLT की बेंगलूरु पीठ ने अपने आदेश में यूनाइटेड टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ एक परिचालन ऋणदाता की याचिका को खारिज कर दिया था। यूनाइटेड टेलीकॉम के खिलाफ यह याचिका 8.46 करोड़ रुपये की कर्ज चूक के लिए दायर की गई थी।

Also read: Zee-Sony मर्जर पर एक्सिस फाइनैंस ने NCLAT का किया रुख, NCLT के आदेश को दी चुनौती

याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने कंपनी के अनुरोध पर उसके साथ एक ‘निपटान’ के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत कुछ राशि का भुगतान किया गया था, जबकि बड़ी राशि बकाया है। उसके वकील ने दलील दी कि संबंधित पक्षों ने MoU पर हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में यूनाइटेड टेलीकॉम को ‘निपटान समझौते’ की शर्तों को पूरा करना चाहिए। हालांकि, यूनाइटेड टेलीकॉम ने स्पष्ट रूप से किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि ‘मांग नोटिस’ जारी होने से पहले ही यह विवाद चल रहा था।

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First Published - September 17, 2023 | 4:40 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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