Noel Tata
टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े अहम संस्थान टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट यानी TEDT में ट्रस्टी नियुक्ति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने वी. श्रीनिवासन और विजय सिंह की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया है। इसे टाटा ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इससे पहले ट्रस्टी मेहली मिस्त्री और जे एन मिस्त्री भी दोनों की पुनर्नियुक्ति का विरोध कर चुके थे। ट्रस्ट डीड के नियमों के अनुसार किसी ट्रस्टी की दोबारा नियुक्ति के लिए सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
बताया जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़े किसी मामले में यह पहला मौका है जब नोएल टाटा ने वी. श्रीनिवासन और विजय सिंह के खिलाफ वोट किया है। आंतरिक संचार से जुड़ी जानकारी के अनुसार दोनों ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ और उनका कार्यकाल 10 मई के बाद समाप्त माना जाएगा।
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 के तहत ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति के लिए सर्वसम्मति आवश्यक है। चूंकि इस मामले में एकमत सहमति नहीं बन सकी, इसलिए दोनों की नियुक्ति आगे नहीं बढ़ पाई।
TEDT यानी टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट, टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के प्रमुख ट्रस्टों में शामिल है। यह ट्रस्ट शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी पहलों पर काम करता है। माना जाता है कि ट्रस्ट के पास 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। छात्रवृत्ति कार्यक्रमों समेत कई शैक्षणिक परियोजनाएं इसी ट्रस्ट के जरिए संचालित की जाती हैं।
नोएल टाटा का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गवर्नेंस, बोर्ड प्रतिनिधित्व और टाटा संस की भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस की सबसे बड़ी नियंत्रक इकाई है और टाटा समूह की दिशा तय करने में इसकी अहम भूमिका रहती है।
सूत्रों के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठकों में टाटा संस के बोर्ड प्रतिनिधित्व, चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के भविष्य और समूह की कुछ कंपनियों के प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी थी। पहले ये बैठकें 8 मई को प्रस्तावित थीं, लेकिन अब इन्हें 16 मई तक टाल दिया गया है।