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ONGC ने दिखाया नेट जीरो लक्ष्य का खाका, 2038 तक 90 लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य

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ओएनजीसी ने अपनी रूपरेखा में नई तकनीक जैसे कार्बन कैप्चर, उपयोगित और भंडारण, बैटरी स्टोरेज प्रणाली एवं इले​क्ट्रिक वाहनों को अपनाना शामिल है।

Last Updated- July 09, 2024 | 11:03 PM IST
ONGC to import ethane to make up for changed Qatar LNG composition

देश की सबसे बड़ी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी ने नेट जीरो उत्सर्जन की रूपरेखा के तहत कंपनी 2038 तक 90 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन घटाने की योजना की आज घोषणा की। इस योजना को अंजाम देने के लिए कंपनी कुल 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके साथ ही ओएनजीसी एक तय समय अव​धि में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करने वाली देश की पहली जीवाश्म ईंधन कंपनी बन गई है।

नेट जीरो ट्रैकर पोर्टल के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारतीय रेल और कोल इंडिया ने भी नेट जीरो लक्ष्यों की घोषणा की है मगर उन्होंने अभी तक विस्तृत योजना या रूपरेखा जारी नहीं की है।

200 पृष्ठों के ‘डीकार्बनाइजेशन रोडमैप’ में कंपनी ने कहा है कि उसने वित्त वर्ष 2030 तक 3.80 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम में पवन ऊर्जा और छोटे जलविद्युत संयंत्र लगाए जाएंगे। वित्त वर्ष 2038 तक कंपनी की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 6.03 गीगावाट हो जाएगी और कंपनी मौजूदा प्राकृतिक गैस और ​ग्रिड बिजली का इस्तेमाल नहीं करेगी।

कंपनी ने इस योजना पर निवेश का भी पूरा ब्योरा दिया है। इन परियोजनाओं पर 2030 तक 97,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और 2035 में 65,000 करोड़ रुपये तथा 2038 में 38,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। 2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च में 80,000 करोड़ रुपये ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर और ऑफशोर पवन ऊर्जा पर 49,000 करोड़ रुपये और ऑनशोर पवन एवं सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर 30,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस योजना से ओएनजीसी को 90 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इसमें स्कोप 1 उत्सर्जन या कंपनी के नियंत्रण में आने वाला प्रत्यक्ष उत्सर्जन और स्कोप 2 या परोक्ष उत्सर्जन जो बिजली की खरीद, कूलिंग आदि से जुड़ी है में कमी आएगी।

ओएनजीसी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2038 तक अतिरिक्त 2.43 करोड़ टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन घटाना है, जो कंपनी के अन्य साझेदारों गेल और आईओसीएल पर निर्भर करेगा। ये कंपनियां ओएनजीसी के उत्पादों का प्रसंस्करण करती हैं और कुल उत्सर्जन में 91 फीसदी हिस्सेदारी इनकी ही है।

नई तकनीक अपनाएगी कंपनी

ओएनजीसी ने अपनी रूपरेखा में नई तकनीक जैसे कार्बन कैप्चर, उपयोगित और भंडारण, बैटरी स्टोरेज प्रणाली एवं इले​क्ट्रिक वाहनों को अपनाना शामिल है। कंपनी कंप्रेस्ड बायोगैस की खपत बढ़ाएगी और ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता में भी इजाफा करेगी।

कंपनी ने आंतरिक कार्बन मूल्य निर्धारण लागू करने की भी योजना बनाई है। ओएनजीसी रोजाना 12.6 लाख बैरल के बराबर तेल का उत्पादन करती है, जो देश के कुल घरेलू उत्पादन का करीब 71 फीसदी है। ओएनजीसी ने वित्त वर्ष 2024 में 20.64 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस और 2.11 करोड़ टन तेल का उत्पादन किया था।

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First Published - July 9, 2024 | 10:11 PM IST

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