फिनटेक क्षेत्र की बड़ी कंपनी पेयू (PayU) भारत में डिजिटल कॉमर्स की बढ़ोतरी के अगले चरण पर दांव लगा रही है। प्रोसस के समर्थन वाली यह कंपनी मर्चेंट और बैंक समाधानों पर अपना ध्यान तेजी से बढ़ा रही है। पेयू के मुख्य कार्याधिकारी अनिर्वाण मुखर्जी ने अजिंक्य कावले के साथ एक साक्षात्कार में अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया। इनमें एआई से जुड़ी प्राथमिकताएं, पिछले अधिग्रहणों से अपेक्षित परिणाम और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग पर लगे नियामकीय प्रतिबंध के बाद की रिकवरी शामिल हैं। उनसे बातचीत के अंश:
वित्त वर्ष 2026 की मुख्य बातें क्या थीं और वित्त वर्ष 2027 के लिए क्या प्राथमिकताएं हैं?
पेयू मुनाफे की राह पर लगातार प्रगति कर रही है। उसने पिछले साल के दौरान अपने पेमेंट एवं क्रेडिट कारोबारों के प्रदर्शन में सुधार किया है। पेयू की रणनीति लगातार पेमेंट और क्रेडिट के मिले-जुले मॉडल पर आधारित है, जिसे उसकी अपनी बैलेंस शीट और एनबीएफसी का सहारा मिला हुआ है। यह एकीकृत तरीका ही उसे दूसरों से अलग करता है।
पेमेंट के मामले में, वह माइंडगेट और विबमो के जरिये मर्चेंट और जारीकर्ता, दोनों पक्षों के लिए समाधान उपलब्ध कराती है। यह ऐसी रणनीति है जो बैंकों को लेनदेन संसाधित करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ व्यापारियों को भुगतान स्वीकार करने में मदद पर भी उतनी ही केंद्रित है। वित्त वर्ष 2027 की प्राथमिकताएं यूपीआई से जुड़ी क्षमताओं के विस्तार पर केंद्रित होंगी, विशेष रूप से माइंडगेट के माध्यम से, क्योंकि यूपीआई पर ऋण सुविधा अगले बड़े इनोवेशन के रूप में उभर रही हैं।
प्रोसस ने बताया कि पेयू ने अपने पेमेंट्स बिजनेस का पुनर्गठन किया है। आपने पिछले दो साल में किस तरह के बदलाव किए हैं?
हमने आरबीआई से बातचीत करके पेमेंट, क्रेडिट, विबमो और माइंडगेट (2025 में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की) इन सभी को एक साथ किया। हमने नया कॉरपोरेट ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत असल में भारत का हमारा कारोबार एक ही जगह आ गया है। यह पेयू पेमेंट्स अंब्रैला है। हमारे लिए यह होल्डिंग कंपनी भी है। हमने भारत के लिए ढांचा बनाया है। एक बोर्ड है जो हमारा कामकाज देखता है। पेमेंट्स का अपना बोर्ड है, जो होल्डको का भी बोर्ड है। क्रेडिट का अपना अलग बोर्ड है।
माइंडगेट के नजरिए से विकास के अगले चरण में क्या शामिल होगा?
बेहतर टीपीएपी समाधान देने का एक मौका है। माइंडगेट आज यह सुविधा दे रही है, लेकिन इसे अगले स्तर पर ले जाने का एक तरीका भी है। कई व्यापारी टीपीएपी बनना चाहते हैं और हम इसमें उनकी मदद कैसे करते हैं? हम उन्हें अनुपालन से जुड़ी हर प्रक्रिया में कदम-कदम पर गाइड करते हैं। इसके अलावा, पेयू ने कुछ और समाधान भी तैयार किए हैं, जैसे लॉयल्टी प्रोग्राम, फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट और कुछ मुख्य समाधान। यूपीआई के क्षेत्र में उन छोटे बैंकों के लिए भी आगे बढ़ने का शानदार मौका है जो अभी तक इस बाजार के बड़े खिलाड़ी नहीं बन पाए हैं। साथ ही, यूपीआई में ‘सीएल’ (क्रेडिट लाइन) की सुविधा भी उपलब्ध है। इन सभी समाधानों पर अभी भी काफी काम करने की जरूरत है।
आईपीओ की योजनाओं के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
अभी तो नहीं, लेकिन जैसे-जैसे हम पूंजी जुटाने के बारे में सोचेंगे और जब हम उस स्तर और परिपक्वता तक पहुंच जाएंगे, जहां कंपनी की वृद्धि, लाभप्रदता और भविष्य की दिशा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगी तो आईपीओ के बारे में सोचना अच्छा और तार्किक कदम होगा।