दिवाला प्रक्रिया के तहत रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण के लिए सफल बोली लगाने वाली IIHL रिलायंस कैपिटल की सब्सिडियरी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी (RGIC ) के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी शेयर विकल्प (ESOP) एवं अन्य प्रोत्साहन योजनाओं को खत्म नहीं कर सकती है। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस ने इस बारे में जो कानूनी राय ली है, उससे यह निष्कर्ष सामने आया है।
रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के लिए यह कानूनी राय लेनी जरूरी हो गई थी क्योंकि हिंदुजा समूह की कंपनी IIHL ने रिलायंस कैपिटल के लिए पेश अपनी समाधान योजना में रिलायंस कैपिटल और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों की सभी कर्मचारी शेयर विकल्प योजनाओं, फैंटम स्टॉक या इसी तरह की अन्य प्रोत्साहन योजनाओं को समाप्त करने की बात कही है। इसके पीछे वजह यह है कि IIHL अधिग्रहण के बाद अतिरिक्त लागत नहीं उठाना चाहती है।
रिलायंस जनरल इंश्योरेंस ने अपने कर्मचारियों को इसॉप जारी किए हैं। खेतान ऐंड कंपनी ने RGIC को दी गई अपनी कानूनी सलाह में कहा है कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत होल्डिंग कंपनी की समाधान योजना लाने पर सब्सिडियरी कंपनियों की संपत्तियों और देनदारियों पर कोई निर्णय लेने की अनुमति नहीं है।
IBC ‘अलग कानूनी इकाई’ के सिद्धांत को मान्यता देता है। इसका मतलब है कि एक बार गठन होने के बाद कंपनी एक अलग कानूनी इकाई बन जाती है और उसका व्यक्तित्व उसके गठन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से अलग होता है।
कानूनी फर्म की सेवा आरजीआईसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) राकेश जैन ने ली है। इसमें कहा गया है कि इसॉप, फैंटम शेयर या अन्य प्रोत्साहन योजनाएं ग्रैच्यूटी, भविष्य निधि की तरह के सांविधिक लाभ हैं। ये RGIC की अपने कर्मचारियों के प्रति देनदारियां हैं। रिलायंस कैपिटल की समाधान योजना में IIHL इनको समाप्त नहीं कर सकती है।